अरुण कुमार गुप्ता
अभी नीट परीक्षा पेपर लीक मामला चल ही रहा था कि एक और पेपर लीक का मामला सामने आ गया है। यह पेपर भाजपा शासित राज्य उत्तराखंड में हुआ है। खबर है कि उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में बीटेक तृतीय वर्ष की दो परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। पेपर लीक का मामला सामने आते ही विश्वविद्यालय ने दोनों परीक्षाएं रद्द कर दी हैं और कारवाई स्वरूप एक सहायक प्रोफेसर को परीक्षा संबंधी कार्यों से सात वर्षों के लिए प्रतिबंधित कर खानापूर्ति कर दी गई है। पिछले कुछ वर्षों में देश के कई राज्यों में भर्ती परीक्षाओं और शैक्षणिक परीक्षाओं के पेपर लीक होने के मामले सामने आए हैं। इससे युवाओं का भरोसा लगातार कमजोर हुआ है। नतीजा आज सबके सामने है पिछले २८ दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर देशभर के युवा छात्र शिक्षा व्यवस्था को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी की सरकार उनकी बात सुनने की बजाय मासूम बच्चों पर ही पुलिस से लाठियां चलवा रही है। सवाल यह है कि यदि प्रश्नपत्र तैयार करने, छापने और वितरण की पूरी प्रक्रिया गोपनीय मानी जाती है, तो बार-बार वही व्यवस्था वैâसे टूट जाती है? इस मामले में भी आरोप है कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए प्रसारित किए गए। अब इस पेपर लीक के बाद वर्ष १९७४ में आई फिल्म `रोटी कपड़ा और मकान’ का एक गीत याद आ रहा है, जो अभिनेता मनोज कुमार पर फिल्माया गया है। और नहीं, बस और नहीं…! सवाल यह है कि आखिर इस देश के युवाओं के भविष्य से कब तक खिलवाड़ होता रहेगा।
जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं!
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन यूं ही नहीं शुरू हुआ था और न ही छात्रों का गुस्सा आसमान से टपका था। इसके लिए मोदी सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिम्मेदार हैं। अब आप सोचिए, एक लड़का सुबह ३:०० बजे उठता है। ठंड हो, गर्मी हो, बरसात हो, घर में खाना पीना हो या न हो, वह मेहनत करता है। पिता कोचिंग की फीस के लिए कर्ज लेता है। मां अपने गहने गिरवी रखती है, इसलिए कि मेरा बेटा पढ़-लिख जाएगा तो डॉक्टर बनेगा। भविष्य सुधर जाएगा। घर की हालत सुधर जाएगी। अच्छे दिन आ जाएंगे। ३ मई को वह लड़का परीक्षा में बैठता है और १२ मई को खबर आती है पर्चा लीक हो गया है। पर्चा पहले से ही बाजार में घूम रहा था। पर्चा लड़के से पहले बाजार में पहुंचा था और पकड़ा कौन गया। एनटीए वालों पर भरोसा वैâसे किया जाए। रक्षक ही भक्षक बन गए। ७ साल में ७० बार पेपर लीक हुए हैं। अब आप उस लड़के से पूछिए जिसने दिन रात मेहनत की। तो ऐसे लड़कों का गुस्सा तो जायज ही है। यह बीमारी काफी पुरानी है, लेकिन इस बीमारी के इलाज के लिए देश के लोगों ने मोदी जी आप पर भरोसा करके देश की कमान सौंपी थी, लेकिन आपने छात्रों की रक्षा नहीं की। आपका सिस्टम भक्षक बन गया। बात यहीं तक नहीं है। इन मासूम छात्रों पर लाठियां भी बरसाई गईं! आपने कहा था कि मैं न खाऊंगा, न खाने दूंगा, लेकिन देश में ठीक इसके उल्टा हो रहा है।
