-बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी के इंस्टाग्राम पोस्ट से उठा तूफान
उमन गुप्ता
राजनीति में कई बार लंबे भाषणों से अधिक असर एक छोटी-सी सोशल मीडिया पोस्ट छोड़ जाती है। भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता सारंगी के इंस्टाग्राम पोस्ट ने ऐसा ही राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। पोस्ट के बाद पार्टी के भीतर नाराजगी की खबरें सामने आईं, सफाई भी आई और सोशल मीडिया पर बहस भी तेज हो गई।
सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक युवा की व्यक्तिगत अभिव्यक्ति थी, या इसने भाजपा के भीतर मौजूद असहजता की झलक भी दिखा दी? भाजपा लंबे समय से खुद को अनुशासित और एकजुट संगठन के रूप में प्रस्तुत करती रही है। ऐसे में यदि किसी सांसद के परिवार से जुड़ा सार्वजनिक संदेश पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग दिखाई देता है, तो स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चाएं तेज हो जाती हैं। हालांकि, उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इसे पार्टी के भीतर किसी संगठित विद्रोह का प्रमाण नहीं कहा जा सकता।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पोस्ट के बाद पार्टी के भीतर असहजता की चर्चा शुरू हुई और सांसद अपराजिता सारंगी को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना पड़ा कि यह उनकी बेटी की व्यक्तिगत राय है, पार्टी की नहीं। यह सफाई अपने आप में बताती है कि मामला केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसका राजनीतिक असर भी महसूस किया गया। विपक्ष इस घटना को भाजपा के भीतर बढ़ते मतभेदों के संकेत के रूप में पेश करने की कोशिश कर सकता है, जबकि भाजपा इसे व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का मामला बता रही है। सच इन दोनों दावों के बीच कहीं हो सकता है। किसी एक पोस्ट के आधार पर बड़े राजनीतिक निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन यह भी सच है कि इसने पार्टी की आंतरिक स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कई सवालों का हुआ जन्म
लोकतंत्र में असहमति असामान्य नहीं होती। प्रश्न यह है कि क्या राजनीतिक दल अपने भीतर उठने वाले अलग-अलग विचारों को स्थान देते हैं या उन्हें केवल अनुशासन के चश्मे से देखते हैं। अर्चिता सारंगी का पोस्ट इसी बहस को फिर से सामने ले आया है। लेकिन इतना अवश्य कहा जा सकता है कि एक इंस्टाग्राम पोस्ट ने उन सवालों को जन्म दिया है जिनका जवाब केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि आने वाले समय की घटनाएं देंगी। राजनीति में कई बार संकेत शब्दों से नहीं, प्रतिक्रियाओं से मिलते हैं और इस पूरे प्रकरण में सबसे अधिक चर्चा प्रतिक्रियाओं की ही रही।
