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खून के सौदागरों पर एफडीए का एक्शन!

-मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले
-तीन ब्लड सेंटरों का लाइसेंस रद्द
-३८ संस्थानों पर बड़ी कार्रवाई

जेदवी / मुंबई

मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले ब्लड सेंटरों पर आखिरकार खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) का शिकंजा कस गया है। रक्त जैसी जीवनरक्षक सेवा में गंभीर लापरवाही और नियमों की खुलेआम अनदेखी करने वाले मुंबई और पुणे के तीन ब्लड सेंटरों के लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिए गए हैं। इस कार्रवाई ने राज्यभर के ब्लड बैंकों में हड़कंप मचा दिया है और साफ संदेश दे दिया है कि अब मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में हुए विशेष निरीक्षण अभियान में मुंबई के सर जे.जे. महानगर ब्लड सेंटर, माया ब्लड सेंटर तथा पुणे के आर.जी. घोलप मेमोरियल ब्लड सेंटर में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुर्इं। जांच में रक्त संग्रह, प्रोसेसिंग और सुरक्षित भंडारण के मानकों का उल्लंघन, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन में लापरवाही, निर्धारित तापमान का पालन न करना, प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की कमी और रिकॉर्ड संधारण में गंभीर खामियां सामने आर्इं। एफडीए ने इन कमियों को सीधे मरीजों की जान के लिए खतरा मानते हुए तीनों केंद्रों के लाइसेंस स्थायी रूप से निरस्त कर दिए। यह कार्रवाई केवल तीन ब्लड सेंटरों तक सीमित नहीं रही। अप्रैल से जून २०२६ के बीच राज्यव्यापी निरीक्षण अभियान में कुल ३८ संस्थानों पर कार्रवाई की गई। इनमें ३४ ब्लड बैंक और ब्लड स्टोरेज सेंटरों के लाइसेंस निलंबित किए गए, जबकि तीन प्रमुख ब्लड सेंटरों पर सबसे कड़ी कार्रवाई करते हुए उनके लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिए गए।
एफडीए ने स्पष्ट किया है कि महाराष्ट्र में संचालित ४१३ लाइसेंसधारी ब्लड सेंटर और ४६८ ब्लड स्टोरेज सेंटरों की नियमित और औचक जांच जारी रहेगी। विभाग का साफ संदेश है कि रक्त की गुणवत्ता, मरीजों की सुरक्षा और कानून के पालन से समझौता करने वाले किसी भी संस्थान को अब कोई राहत नहीं मिलेगी। सवाल यह है कि वर्षों से चल रहीं इन गंभीर लापरवाहियों पर कार्रवाई अब जाकर क्यों हुई और क्या बाकी संदिग्ध केंद्रों की भी इसी कठोरता से जांच होगी?
ब्लड की सुरक्षा पर एफडीए का डंडा!
मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले तीन ब्लड सेंटरों पर एफडीए ने शिकंजा कसते हुए लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिए। जांच में रक्त भंडारण, सुरक्षा मानकों और रिकॉर्ड में गंभीर खामियां मिलीं। राज्यभर के ३८ सेंटरों पर कार्रवाई से मचा हड़कंप।

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