यूनिफॉर्म बनी पहचान जोगेश्वरी पुलिस ने ९० मिनट में परिवार से मिलाया
जेदवी
जोगेश्वरी की व्यस्त सड़कों पर गुरुवार शाम एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने यह साबित कर दिया कि सतर्कता और संवेदनशीलता साथ हों तो बिछड़े रिश्ते भी कुछ ही पलों में फिर जुड़ सकते हैं। रोते-बिलखते एक आठ वर्षीय विशेष (नॉन-वर्बल) बच्चे को जोगेश्वरी पुलिस ने महज ९० मिनट में उसके परिवार से मिलाकर मानवीय संवेदनाओं और जिम्मेदार पुलिसिंग की मिसाल पेश की। ३० जुलाई की शाम करीब चार बजे जोगेश्वरी पुलिस स्टेशन के पुलिस नाईक जगन्नाथ मिसाल सुभाष रोड स्थित ‘येवले टी शॉप’ के पास नियमित गश्त पर थे। इसी दौरान उनकी नजर एक छोटे बच्चे पर पड़ी, जो अकेला खड़ा रो रहा था। पुलिसकर्मी ने उसे शांत कराने और उसके घर का पता जानने की कोशिश की, लेकिन बच्चा अपना नाम, पता या किसी परिजन की जानकारी नहीं दे सका। वह बार-बार केवल ‘अब्बा’ और ‘अम्मा’ शब्द ही दोहरा रहा था।
जब सभी रास्ते बंद नजर आने लगे, तभी बच्चे की टी-शर्ट पर छपा एक नाम उम्मीद की किरण बन गया। उसकी यूनिफॉर्म पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका हिंदी स्कूल, जोगेश्वरी (पूर्व) का नाम और लोगो दिखाई दिया। पुलिस ने बिना देर किए स्कूल पहुंचकर जानकारी जुटाई। वहां पता चला कि बच्चा अब उस स्कूल में नहीं पढ़ता, लेकिन पुराने रिकॉर्ड से मालूम हुआ कि वह फिलहाल सोपान स्पेशल इंग्लिश मीडियम स्कूल का छात्र है। इसके बाद पुलिस ने तुरंत उस स्कूल से संपर्क किया। शिक्षिका नेहा तेंदुलकर ने बच्चे की पहचान शाहबाज के रूप में की और उसके पिता रियाज अहमद अकबर अली अंसारी का मोबाइल नंबर तथा पता पुलिस को उपलब्ध कराया। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक इकबाल शिकलगार के मार्गदर्शन में पुलिस टीम ने तुरंत परिवार से संपर्क साधा।
उधर, शाहबाज के अचानक लापता होने से उसका परिवार बदहवास होकर उसकी तलाश में जुटा था। पिता और अन्य परिजन उसे खोजते-खोजते थक चुके थे और पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने ही जा रहे थे कि तभी पुलिस का फोन आ गया। कुछ ही देर बाद माता-पिता जब जोगेश्वरी पुलिस स्टेशन पहुंचे और अपने बेटे को सुरक्षित देखा, तो उनकी आंखों से राहत के आंसू छलक पड़े। आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बच्चे को परिवार के सुपुर्द कर दिया गया।
९० मिनट में लौटी माता-पिता की मुस्कान!
जोगेश्वरी पुलिस की सतर्कता से भटकता हुआ ८ वर्षीय विशेष बच्चा सुरक्षित अपने परिवार तक पहुंच गया। नाम-पता नहीं बता पाने वाले मासूम की टी-शर्ट बनी पहचान का जरिया। पुलिस की सूझ-बूझ और मानवीय पहल ने एक परिवार को बिछड़ने के दर्द से बचा लिया।
