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प्रशांत किशोर जिधर, चुनाव की जीत उधर

 अनिल मिश्र / पटना

प्रशांत किशोर यानी पीके जिधर भी जाते हैं, जीत उधर ही होती है यह अतिश्योक्ति नहीं है बल्कि इसके प्रमाण यानी परिणाम भी सामने हैं। हालांकि प्रशांत किशोर की अगुवाई और रणनीति की बजह केन्द्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार और विपक्षी पार्टियां विधानसभा चुनाव में जीतते और हैट्रिक लगाते रहे हैं। हालांकि आठ चुनाव में एक बार हार का भी सामना करना पड़ा है। बात सन 2014 में लोकसभा चुनाव की है। जिसमें नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज कर अभी तक यानी बारह सालों तक सता का स्वाद चख रही है। दरअसल यह ‘चाय पर चर्चा’ जैसे कैंपेन हिट रहे। वहीं 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन जनता दल यूनाइटेड के नीतीश कुमार और राष्ट्रीय जनता दल के लालू प्रसाद यादव को साथ लाकर बीजेपी को करारी शिकस्त दी थी। जबकि 2017 पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब दा कैप्टन’ कैंपेन के जरिए कांग्रेस की शानदार वापसी कराई थी। वहीं 2019 आंध्र प्रदेश में वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने चंद्रबाबू नायडू को हराकर जगन मोहन रेड्डी ने बंपर जीत हासिल किए थे। यह भी प्रशांत किशोर यानी पीके के ही रणनीतिकार रहने के कारण संभव हो पाया था। उसके बाद 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर दिल्ली में एकतरफा जीत दर्ज किया था। इसके बाद 2021 पं बंगाल ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी की आक्रामक चुनौती के बावजूद टीएमसी को प्रचंड बहुमत दिलाया था। वहीं 2021 में तमिलनाडु एम.के. स्टालिन डीएमके (द्रमुक) ने दस साल बाद तमिलनाडु की सत्ता में वापसी किया । वहीं उनके सुत्रधार रहने के बाबजूद केवल एक बड़ा अपवाद (हार) रहा है।2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने इस चुनाव में कांग्रेस के लिए रणनीति बनाई थी (और बाद में सपा-कांग्रेस गठबंधन हुआ), लेकिन वहां भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और यह प्रशांत किशोर की रणनीति की इकलौती बड़ी असफलता मानी जाती है।यही वजह है कि भारतीय राजनीति में यह धारणा बन गई है कि “पीके जिधर रहते हैं, रणनीतिक तौर पर पलड़ा उधर ही भारी हो जाता है”। अब बांकीपुर 2026 की जीत ने यह साबित कर दिया है कि वे केवल दूसरों को ही चुनाव जिताना नहीं जानते, बल्कि खुद भी जमीन पर उतरकर पारंपरिक बड़ी पार्टियों को मात दे सकते हैं।

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