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वाराणसी में पूरी अकीदत के साथ मनाया गया इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला का चेहल्लुम

-नगर के अलग-अलग इलाकों से 28 अंजुमनों ने निकाला अलम, ताबूत, ताजिया, दुलदुल और अमारी का जुलूस

उमेश गुप्ता / वाराणसी

इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला का चेहल्लुम मंगलवार को अकीदत के साथ मनाया गया। इस दौरान नगर के अलग-अलग इलाकों से 28 अंजुमनों ने अलम, ताबूत, ताजिया, दुलदुल और अमारी का जुलूस निकाला। अजादारों ने नौहा और मातम कर इमाम हुसैन को खिराज-ए-अकीदत पेश किया। साथ ही जंजीर और कमा के मातम के जरिए खून का नजराना भी पेश किया।
इमामबाड़ा कच्ची सराय, दालमंडी से जुलूस निकाला गया। यह जुलूस 400 वर्ष पुराना बताया जाता है। जुलूस में अलम की देखरेख सैयद इकबाल हुसैन और जफर हसन ने की। जुलूस का नेतृत्व अंजुमन जावादिया ने किया। यह दालमंडी, नई सड़क, फाटक, सलीम काली महाल और पितरकुंडा होते हुए फातमान पहुंचा, जहां जुलूस संपन्न हुआ।
पूरे मार्ग में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। उन्होंने हजरत इमाम हुसैन की याद में मातम कर खिराज-ए-अकीदत पेश की। अंजुमन जव्वादिया के नोहाख्वां साजिद हुसैन ने नोहा पढ़े। इनमें शायर कविश बनारसी का लिखा नोहा “गूंजी है कर्बला में सदा, मैं हुसैन हूं, नाना मेरे रसूले खुदा, मैं हुसैन हूं” शामिल था। नोहाख्वानी और मातम से वातावरण गम और अकीदत से भर गया। इस दौरान कई अकीदतमंद भावुक भी हो उठे।

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