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कुंभ मेले के ठेके गुजरात के ठेकेदारों को!..राज ठाकरे का सरकार पर हमला

सुनील ओसवाल / मुंबई

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने एक ही मंच से सरकार और व्यवस्था पर तीखा हमला बोला, जिससे राज्य की राजनीति में नई बहस छिड़ गई। राज ठाकरे ने जहां चुनाव जीतने की मौजूदा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए उसे प्रâॉड करार दिया, वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के छात्रों से संवाद को ‘बहुत देर से उठाया गया कदम’ बताया। इतना ही नहीं, उन्होंने नासिक सिंहस्थ कुंभ मेले के करोड़ों रुपए के ठेकों में गुजरात की कंपनियों को प्राथमिकता दिए जाने के मुद्दे पर भी सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
राज ठाकरे ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का नाम नहीं है। यदि चुनावी प्रक्रिया पर ही लोगों का भरोसा कमजोर होने लगे, तो लोकतंत्र की बुनियाद हिलने लगती है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज चुनाव जीतने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और इस पर खुली बहस होनी चाहिए। आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत द्वारा विद्यार्थियों से संवाद की पहल पर भी राज ठाकरे ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं से संवाद होना चाहिए, लेकिन यह पहल बहुत पहले होनी चाहिए थी। अब, जब नई पीढ़ी के सामने अनेक सामाजिक, शैक्षणिक और वैचारिक चुनौतियां खड़ी हैं, तब जाकर संवाद शुरू करना देर से लिया गया पैâसला है। राज ठाकरे का सबसे आक्रामक हमला नासिक सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या महाराष्ट्र में ठेकेदार पैदा ही नहीं हुए हैं, जो गुजरात की कंपनियों को काम दिया जा रहा है?
स्थानीय उद्योग और रोजगार के साथ अन्याय
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के करदाताओं के पैसे से होने वाले विकास कार्यों में यदि राज्य के ही सक्षम ठेकेदारों की अनदेखी की जा रही है, तो यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि स्थानीय उद्योग और रोजगार के साथ अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार स्थानीय बनाम बाहरी के सवाल को नजरअंदाज कर रही है। यदि महाराष्ट्र के ठेकेदारों को ही अपने राज्य के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन में अवसर नहीं मिलेगा, तो स्थानीय उद्यमियों का सरकार पर विश्वास वैâसे कायम रहेगा?

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