सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई हाई कोर्ट ने शुक्रवार को डोंबिवली के शास्त्री नगर म्युनिसिपल अस्पताल में डॉक्टरों से मारपीट के मामले में गिरफ्तार शिंदे गुट के नगरसेवक रमेश म्हात्रे और तीन अन्य आरोपियों को जमानत देने का आदेश दिया, लेकिन इसके साथ सख्त शर्त भी लगाई। अदालत ने कहा कि चार्जशीट दाखिल होने तक चारों आरोपियों को महाराष्ट्र से बाहर रहना होगा।
म्हात्रे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने जमानत की मांग करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल चार्जशीट दाखिल होने तक महाराष्ट्र से बाहर रहने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत चाहे तो अन्य सख्त शर्तें भी लगा सकती है। गौरतलब है कि यह मामला ६ जुलाई का है। आरोप है कि डोंबिवली के शास्त्री नगर म्युनिसिपल अस्पताल में नगरसेवक रमेश म्हात्रे और उनके साथियों ने एक महिला डॉक्टर समेत अन्य डॉक्टरों के साथ मारपीट की थी। इसके बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। मुंबई हाई कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था, क्योंकि एक महिला डॉक्टर पर कथित क्रूर हमला हुआ था। इस घटना के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने हड़ताल भी की थी। अदालत ने पहले चारों आरोपियों के जमानत आदेश पर रोक लगा दी थी और मजिस्ट्रेट अदालत से रिहा होने के बाद रमेश म्हात्रे को दोबारा जेल भेजने का आदेश दिया था। राज्य की ओर से पेश सरकारी वकील शिशिर हिरे ने अदालत को बताया कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और १० दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी। केवल फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है। अदालत की सहायता के लिए नियुक्त एमिकस क्यूरी अशोक मुंदरगी ने दलील दी कि मामले में जनप्रतिनिधियों के शामिल होने के कारण न्याय व्यवस्था में लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए त्वरित सुनवाई आवश्यक है। वहीं, आईएमए की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस. यू. कामदार ने मांग की कि रमेश म्हात्रे को मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक मुंबई से बाहर रखा जाए।
