-मुंबई मनपा में ६ नई इनोवा क्रिस्टा पर १.५ करोड़ खर्च का प्रस्ताव
– ‘आराम’ के नाम पर जनता की जेब पर बोझ?
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई की सड़कों पर गड्ढे हैं, बरसात में जलभराव है, ट्रैफिक की रफ्तार रेंग रही है और मुंबईकर रोजमर्रा की समस्याओं से जूझ रहे हैं। दूसरी तरफ मुंबई मनपा के कुछ राजनीतिक पदाधिकारियों को अब स्कॉर्पियो से इनोवा क्रिस्टा में अपग्रेड की जरूरत महसूस होने लगी है। मनपा में छह नई टोयोटा इनोवा क्रिस्टा गाड़ियों की खरीद पर करीब १.५ करोड़ खर्च करने का प्रस्ताव सामने आते ही राजनीति गरमा गई है।
यानी जिस महानगरपालिका के सामने सड़क, नाले, कचरा, यातायात और बुनियादी सुविधाओं की चुनौतियां हैं, वहां सवाल उठ रहा है कि जनता के पैसे से नेताओं की गाड़ी पहले बदलेगी या मुंबई की हालत? मामला सिर्फ छह गाड़ियों का नहीं है। यह उस राजनीतिक सोच का सवाल है, जिसमें जनता से जुड़े सवाल पीछे छूट जाते हैं और जनप्रतिनिधियों का ‘आराम’ प्राथमिकता बन जाता है।
कुछ महीने पहले स्कॉर्पियो, अब इनोवा!
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मनपा ने इसी वर्ष जनवरी में ५४ स्कॉर्पियो ६ एसयूवी और ९ होंटा सिटी को वेट लीज पर लिया था। इसके कुछ ही महीनों बाद छह नई इनोवा का प्रस्ताव सामने आया। रिपोर्टों के मुताबिक नई गाड़ियों का इस्तेमाल बीएमसी के प्रमुख राजनीतिक पदाधिकारियों के लिए किया जाना है। बताया गया कि मौजूदा स्कॉर्पियो को लेकर ‘आराम’ और सड़क पर झटकों जैसी शिकायतें सामने आर्इं।
फडणवीस ने भी दिखाई लाल झंडी
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जनता का पैसा विकास और जरूरी नागरिक सुविधाओं पर खर्च होना चाहिए, न कि विलासिता पर। मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी मनपा के लिए राजनीतिक आईना है। क्योंकि छह गाड़ियों पर १.५ करोड़ का प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब मुंबई में नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
मनसे का ‘खिलौना विरोध’
विवाद ने तब और दिलचस्प रूप लिया जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने मनपा आयुक्त को टोयोटा इनोवा के खिलौने भेजकर प्रतीकात्मक विरोध किया। संदेश साफ था कि अगर नेताओं को इनोवा चाहिए तो पहले जनता से पूछिए कि उसे क्या चाहिए।
यह विरोध भले प्रतीकात्मक हो, लेकिन इसके पीछे मुंबईकरों का पुराना सवाल खड़ा है- मनपा की प्राथमिकता क्या है? अगर १.५ करोड़ से छह नई गाड़ियां खरीदी जा सकती हैं तो उसी पैसे से कितनी नागरिक सुविधाएं सुधारी जा सकती थीं।
