मुख्यपृष्ठसमाज-संस्कृतिअन्नदान की सिल्वर जुबली

अन्नदान की सिल्वर जुबली

रवीन्द्र मिश्रा / मुंबई

अन्न का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। हम उसे पकाकर भोजन के रूप में स्वीकार करते हैं। इससे शरीर और आत्मा दोनों की तृप्ति होती है। इसी उद्देश्य को लेकर नालासोपारा पश्चिम स्थित इस्कॉन मंदिर में प्रत्येक शनिवार शाम को लोगों के लिए भंडारा यानी अन्नदान की व्यवस्था की जाती है। इस वर्ष यह मंदिर भंडारे की अपनी सिल्वर जुबली मना रहा है। यह कार्यक्रम यहां पिछले 25 वर्षों से अनवरत जारी है।
इस अन्नदान को लेकर इस्कॉन मंदिर के एच. जी. मधुमंगलदास प्रभु बताते हैं कि शास्त्रों में इसका बहुत महत्व है। अन्न से ही संपूर्ण जगत का पालन-पोषण होता है और इन अन्नों में चावल का विशेष महत्व है। इसलिए हमेशा चावल-दाल का ही दान किया जाता है, क्योंकि चावल को पूर्णता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इस दान से घर में सुख-समृद्धि और लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। इससे बने भोज्य पदार्थ दान करने से पितरों को संतुष्टि मिलती है। इससे 21 पीढ़ियों का उद्धार होता है।
शास्त्रों में देवताओं को भी माता पार्वती से भिक्षा मांगते हुए कहा गया है—‘अन्नपूर्णे सदापूर्णे, शंकर प्राणवल्लभे, ज्ञान वैराग्य सिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वती।’
आपका यह भंडारा पिछले 25 वर्षों से कैसे चल रहा है? के जवाब में मधुमंगलदास प्रभु जी कहते हैं कि यह जगन्नाथ जी का मंदिर है। वह चींटी से लेकर हाथी तक सबके पेट भरते हैं, तो मनुष्य का पेट क्यों नहीं भर सकते। वे किसी न किसी रूप में अपने भंडारे में भंडार भर देते हैं। उनकी महिमा वे ही जानें।

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