महान शायर फ़िराक़ गोरखपुरी की स्मृति में मुंबई की प्रमुख संस्था ‘बतरस’ द्वारा एक विशेष साहित्यिक संध्या का आयोजन किया गया। “सुख़न की शम्मअ जलाओ” शीर्षक से आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में फ़िराक़ साहब की शख्सियत, उनके जीवन-दर्शन और भारतीय साहित्य में उनके अतुलनीय योगदान पर वक्ताओं ने विस्तार से चर्चा की।
फ़िराक़ गोरखपुरी की रचनात्मक विरासत और उनके साहित्यिक अवदान पर विचार साझा करने वाले प्रमुख वक्ता प्रो. रामबक्ष, असलम हसन, ओबैद आज़म आज़मी, डॉ. सत्यदेव त्रिपाठी, देवमणि पांडेय, राकेश शर्मा, रमन मिश्र और विजय पंडित थे। फ़िराक़ साहब की लोकप्रिय ग़ज़लों का भावपूर्ण पाठ शैलेश सिंह, प्रज्ञा मिश्र और नीता बाजपेई ने किया। गायक दीपक खेर, नाज़नीन और कृष्णा गौतम की संगीतबद्ध प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और भी यादगार बना दिया।
“सुख़न की शम्मअ जलाओ” संध्या ने एक बार फिर साबित कर दिया कि फ़िराक़ गोरखपुरी की शायरी और उनकी बेबाक़ शख्सियत आज भी अदब प्रेमियों के दिलों में उतनी ही ज़िंदा और प्रासंगिक है। इस शानदार आयोजन का कुशल संचालन एवं संयोजन सुप्रसिद्ध शायर क़मर हाजीपुरी ने किया। उनके बेहतरीन अंदाज़-ए-बयां का श्रोताओं ने भरपूर लुत्फ़ उठाया।
यह आयोजन 8 अगस्त 2026 की शाम को गोरेगांव, मुंबई स्थित केशव गोरे स्मारक ट्रस्ट के टेरेस हॉल में संपन्न हुआ। इसमें अच्छी तादाद में साहित्य, शायरी और संगीत प्रेमी शामिल हुए।
-देवमणि पांडेय
