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फर्जी डिग्री से वकालत का खेल! 105 वकील रडार पर, 35 पर एफआईआर

-इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद बार काउंसिल की कार्रवाई तेज
-सत्यापन में सामने आया फर्जीवाड़ा, कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों की डिग्रियां भी संदिग्ध

राजेश सरकार / प्रयागराज
कानून की डिग्री लेकर अदालतों में न्याय की पैरवी करने वाले कुछ अधिवक्ताओं ने अगर फर्जी दस्तावेजों के सहारे वकालत का लाइसेंस हासिल किया है तो यह न्याय व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर खतरे की घंटी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद उत्तर प्रदेश में ऐसे अधिवक्ताओं के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू हो गया है। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश द्वारा कराए गए सत्यापन में 105 ऐसे अधिवक्ताओं को चिह्नित किया गया है, जिनकी लॉ डिग्रियां फर्जी पाई गई हैं। इनमें से करीब 35 मामलों में अब तक एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है, जबकि शेष मामलों में भी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव के मुताबिक, हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में फर्जी लॉ डिग्री के आधार पर पंजीकरण कराने वाले अधिवक्ताओं की सूची तैयार की गई है। सत्यापन के दौरान सामने आए मामलों में संबंधित अधिवक्ताओं के खिलाफ पुलिस को कार्रवाई के लिए सूची उपलब्ध कराई गई है।
हाईकोर्ट के आदेश ने खोली फर्जी डिग्री की परतें
यह पूरा मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में वाद संख्या बी/3/26 और याचिका संख्या 3010/20 में पारित आदेश के बाद सामने आया। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि जिन अधिवक्ताओं की डिग्रियां सत्यापन में फर्जी पाई जाएं, उनके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए। इसके बाद बार काउंसिल ने लॉ डिग्रियों और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन शुरू कराया। जांच में सामने आया कि कुछ लोगों ने कथित तौर पर फर्जी डिग्रियों के आधार पर बार काउंसिल में पंजीकरण कराया और अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस शुरू कर दी।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की डिग्रियां भी संदिग्ध
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सत्यापन में इलाहाबाद विश्वविद्यालय समेत कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों की डिग्रियां भी फर्जी पाई गई हैं। बार काउंसिल सचिव ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा कि यह कल्पना करना भी मुश्किल था कि इतने प्रतिष्ठित संस्थानों के नाम पर फर्जी डिग्रियां तैयार कर वकालत में प्रवेश लिया जा सकता है। मामले में विश्वविद्यालय स्तर पर भी यह जांच का विषय है कि आखिर इन संस्थानों के नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी डिग्रियां कैसे तैयार हुईं। यदि किसी विश्वविद्यालय के कर्मचारी की मिलीभगत से फर्जी प्रमाणपत्र जारी होने की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
100 मामलों की तहरीर, 35 पर मुकदमा दर्ज
बार काउंसिल सचिव के अनुसार, करीब 100 मामलों की तहरीर सिविल लाइंस थाने में उपलब्ध कराई जा चुकी है। इनमें से सोमवार तक 35 अधिवक्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी थी। पुलिस स्तर पर अन्य मामलों में भी मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। प्रयागराज के डीसीपी सिटी मनीष शांडिल्य ने बताया कि एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रत्येक अधिवक्ता और फर्जी डिग्री का मामला अलग होने के कारण अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। एक साथ 100 एफआईआर दर्ज करना व्यावहारिक नहीं है, इसलिए चरणबद्ध तरीके से मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और इसकी जानकारी बार काउंसिल को भी दी जा रही है।
पूरे यूपी में फैला जाल
जांच के दायरे में आए अधिवक्ता केवल प्रयागराज के रहने वाले नहीं हैं। सामने आए मामलों में मथुरा, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, गाजियाबाद, प्रतापगढ़, हरदोई, गौतमबुद्धनगर और सहारनपुर समेत कई जिलों के अधिवक्ताओं के नाम शामिल हैं।
बार काउंसिल का कहना है कि सत्यापन अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। भविष्य में जिस भी अधिवक्ता की डिग्री फर्जी पाई जाएगी, उसके खिलाफ भी हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
12 अधिवक्ताओं पर पहले ही हो चुकी है कार्रवाई
फर्जी डिग्री के मामले में कार्रवाई का यह सिलसिला नया नहीं है। इससे पहले भी बार काउंसिल सचिव आरके शुक्ला की तहरीर पर सिविल लाइंस थाने में एक दर्जन अधिवक्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। इन पर विभिन्न विश्वविद्यालयों से कथित रूप से फर्जी लॉ डिग्री प्राप्त कर अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराने का आरोप है। पुलिस इन मामलों की विवेचना पहले से कर रही है। आरोपियों में प्रदेश के अलग-अलग जिलों के लोग शामिल बताए गए हैं।
सैकड़ों और नाम सामने आने की आशंका
बार काउंसिल पदाधिकारियों का कहना है कि फर्जी डिग्रियों का सत्यापन अभियान लगातार जारी है। फिलहाल उत्तर प्रदेश में चुनाव की मतगणना के कारण सत्यापन की गति कुछ प्रभावित हुई है, लेकिन जांच बंद नहीं हुई है। भविष्य में और अधिवक्ताओं की डिग्रियां संदिग्ध मिलने पर उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होगी।
अब सवाल सिर्फ 105 अधिवक्ताओं का नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था का है, जिसने फर्जी डिग्री के सहारे लोगों को न्याय के मंदिर तक पहुंचने का रास्ता दिया। यदि जांच निष्पक्ष और गहराई से हुई तो आने वाले दिनों में फर्जी डिग्री के इस खेल से जुड़े कई और चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।

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