राजेश सरकार / प्रयागराज
यूपी एसटीएफ ने अपनी लोकल यूनिट के माध्यम से ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के काले साम्राज्य के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक की है। एसटीएफ ने संगठित गिरोह बनाकर rolexpanel.win नाम की अवैध सट्टेबाजी वेबसाइट के जरिए पिछले कई महीनों से करोड़ों रुपये का अवैध टर्नओवर खड़ा करने वाले एक अंतर्राज्यीय सिंडिकेट का सनसनीखेज पर्दाफाश किया है। एसटीएफ ने जाल बिछाकर गिरोह के मास्टरमाइंड समेत चार शातिर अपराधियों को दबोच लिया है, जिनके तार उत्तर प्रदेश से लेकर छत्तीसगढ़ तक जुड़े हुए हैं।
– मुर्गी फार्म की आड़ में अपराधियों का ‘हाईटेक कंट्रोल रूम’
एसटीएफ की पूछताछ में गिरफ्तार मुख्य अभियुक्त बृजेश कुमार सिंह उर्फ टीटू ने अपने पूरे काले कारनामे कुबूल कर लिए हैं। शातिर दिमाग बृजेश ने पुलिस और समाज की आंखों में धूल झोंकने के लिए मेजा थाने के ग्राम मिश्रपुर स्थित अपने ठिकाने पर एक मुर्गी फार्म खुलवा रखा था। लेकिन इस फार्म में मुर्गियां पालने के बजाय, वह देश के अलग-अलग जिलों से बुलाए गए अपने युवा साथियों के साथ मिलकर देशव्यापी ऑनलाइन सट्टेबाजी का ‘हाईटेक कंट्रोल रूम’ ऑपरेट कर रहा था।
– गिरफ्तार अभियुक्तों की कुंडली: वाराणसी से छत्तीसगढ़ तक फैला जाल
एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार किए गए चारों अभियुक्तों की पहचान बृजेश कुमार सिंह उर्फ टीटू (26) पुत्र भानू प्रताप सिंह, निवासी ग्राम शम्भूचक, थाना मेजा प्रयागराज। अभिषेक कुमार (20) पुत्र चन्द्रशेखर कुमार निवासी दिलबहार कालोनी डीएलडब्लू, वाराणसी। प्रिन्स कुमार उर्फ गौतम (20) पुत्र हौसला प्रसाद निवासी ग्राम उरूवा, मेजा। मितेश प्रधान (26) पुत्र कुबेर प्रधान निवासी गौटिया पारा तरड़ा रायगढ़, छत्तीसगढ़ के रूप में एसटीएफ ने की है।
– सट्टा हब से बरामद हुआ ‘हाईटेक हथियारों’ का जखीरा
एसटीएफ ने जब मिश्रपुर स्थित इस अवैध ठिकाने पर छापेमारी की, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गई। अपराधियों के पास से किसी बड़े कॉर्पोरेट ऑफिस की तरह हाईटेक गैजेट्स बरामद हुए हैं। पुलिस ने मौके से एक लैपटॉप, एक टैबलेट, 13 स्मार्ट मोबाइल फोन और तेज इंटरनेट के लिए एक जियो एयर फाइबर सेट। 24 पैक्ड सिम कार्ड, 4 खुले हुए सिम कार्ड और 5 सिम कार्ड कागज की पर्ची में लिपटे हुए (यानी कुल 33 सिम कार्ड)। 10 यूपीआई क्यूआर कोड स्टीकर, एक क्यूआर कोड मय स्टैंड और लेनदेन की पुष्टि के लिए 5 क्यूआर कोड साउंड बॉक्स।13 डेबिट/क्रेडिट कार्ड, 3 आधार कार्ड और फर्जी बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के लिए एक ऑप्टीकल फिंगर स्कैनर। सट्टे के हिसाब-किताब के लिए 3 रजिस्टर और 23,000 रुपये नगद।
‘भूतिया सिम’ का खतरनाक खेल
इस सिंडिकेट का ‘मॉडस ऑपेरेंडी’ (काम करने का तरीका) बेहद चौंकाने वाला है। यह गिरोह भारी संख्या में नए सिम कार्ड खरीदता था। इन सिम कार्ड्स को असली ग्राहकों को भनक लगे बिना, दूसरों के आईडी और फेंक डाक्यूमेंट्स (जाली कागजात) के जरिए फिंगर स्कैनर की मदद से एक्टिवेट कर लिया जाता था। पुलिस की भाषा में कहें तो ये सिम कार्ड पूरी तरह ‘भूतिया’ (म्यूल सिम) थे, जिनका इस्तेमाल सिर्फ वित्तीय अपराध को अंजाम देने के लिए किया जा रहा था।
– एयरटेल पेमेंट बैंक का ‘हथियार’ की तरह इस्तेमाल
फर्जी सिम कार्ड हाथ में आते ही डिजिटल ठगी का दूसरा चरण शुरू होता था। गिरोह इन एक्टिवेटेड सिम नंबर्स के जरिए एयरटेल पेमेंट बैंक में तुरंत ऑनलाइन खाते खुलवा लेता था। दूसरों की पहचान का इस्तेमाल कर ये अपराधी यूपीआई आईडी और एमपिन सेट कर लेते थे। इसके बाद, क्यूआर कोड और साउंड बॉक्स के जरिए देश भर से rolexpanel.win वेबसाइट पर सट्टा लगाने वाले लोगों का पैसा सीधे इन्हीं फर्जी खातों में ट्रांसफर कराया जाता था।
– नंबर ब्लॉक होते ही बदल देते थे ‘पैंतरा’
यह सिंडिकेट तकनीक और बैंकिंग सिस्टम की खामियों का पूरा फायदा उठा रहा था। एक ही यूपीआई आईडी पर जब करोड़ों रुपये का संदिग्ध और अत्यधिक लेनदेन होता था, तो बैंक या सुरक्षा एजेंसियां उस मोबाइल नंबर को ब्लॉक या बंद कर देती थीं। लेकिन कानून को चकमा देने के लिए अपराधियों के पास बैकअप प्लान तैयार रहता था। जैसे ही एक नंबर ब्लॉक होता, गिरोह तुरंत अपने पास मौजूद पैक्ड सिम कार्ड्स की खेप से दूसरा फर्जी सिम निकालता और नया पेमेंट गेटवे चालू कर देता था।
– बैंक खातों को खंगाल रही साइबर सेल, कई और चेहरे होंगे बेनकाब
एसटीएफ पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की तैयारी है। बरामद रजिस्टरों से एसटीएफ को कई अहम सुराग और बैंक खातों की जानकारी मिली है। साइबर सेल इन फर्जी खातों में आए पैसों के अंतिम ठिकाने का पता लगा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार अभियुक्तों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है, जिससे इस सट्टा साम्राज्य के पीछे छिपे कुछ बड़े सफेदपोश आकाओं और फाइनेंसरों के नाम भी सामने आने की पूरी उम्मीद है।
