अनिल मिश्र / पटना
भारतीय स्वाधीनता के लिए महज 18 वर्ष की उम्र में फांसी पर चढ़ने वाले महान क्रांतिकारी योद्धा खुदीराम बोस का 98वां शहादत दिवस बिहार प्रदेश की ऐतिहासिक नगरी गयाजी के स्थानीय चौक स्थित राजेंद्र टावर के पास मनाया गया। इस अवसर पर महान स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस के चित्र पर सर्वप्रथम माल्यार्पण किया गया। इसके पश्चात उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला गया।
वहीं, इस कार्यक्रम में शामिल बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रतिनिधि विजय कुमार मिठ्ठू, शिव कुमार चौरसिया, श्रीकांत शर्मा, प्रद्युम्न दुबे, बाबूलाल प्रसाद सिंह, टिंकू गिरी, राम प्रमोद सिंह, सिपाही चंद्रवंशी, सत्येंद्र सिंह, पपु दुःखरनि, अशोक राम, रूपेश चौधरी आदि ने कहा कि मुजफ्फरपुर के जिला जज किंग्सफोर्ड के बगीचे पर बम फेंकने के जुर्म में उन्हें 18 वर्ष की उम्र में मुजफ्फरपुर केंद्रीय कारा में फांसी दी गई थी, जिसके बाद समूचे देश में देशभक्ति की लहर उमड़ पड़ी थी। उनके साहसिक योगदान को अमर करने के लिए गीत रचे गए और उनका बलिदान लोकगीत के रूप में मुखरित हुआ।
इस बीच, इन सभी वक्ताओं ने कहा कि आज जरूरत है कि खुदीराम बोस की शहादत से सीख लेकर देश से गलत चीजों को उखाड़ फेंकने की। देश में विगत कुछ महीनों से छात्रों में शिक्षा सुधार के प्रति उबाल है। छात्र-युवा आंदोलित हैं। इस आंदोलन में छोटे-छोटे बच्चों से लेकर छात्र-छात्राएं शामिल हैं।
