मुख्यपृष्ठस्तंभमुस्लिम वर्ल्ड: मक्का डील के बाद हूती बेकाबू!

मुस्लिम वर्ल्ड: मक्का डील के बाद हूती बेकाबू!

सूफी खान

सऊदी पर मिसाइल और ड्रोन बरसाए
यमन के ईरान हिमायती अंसारुल्लाह की तरफ से ये मैसेज दिया जा रहा है कि सऊदी, तुर्की, पाकिस्तान डील का उन पर कोई असर नहीं हुआ है, बल्कि उनका ये इरादा और मजबूत हुआ है कि हम सऊदी के जरिए यमन पर लगाए गए ब्लाकेज को खत्म करके ही रहेंगे, साथ ही यमन के दूसरे हिस्से में सऊदी प्रॉक्सिस का असर भी खत्म किया जाएगा।
क्योंकि देखा जा रहा है कि इधर सऊदी, तुर्की और पाकिस्तान की डील हुई उधर यमन के हूती या अंसारुल्लाह ने सऊदी अरब पर हमले तेज कर दिए थे। यमन के अंसारुल्लाह ने सऊदी अरब और यमन की सऊदी समर्थक सरकार के कंट्रोल वाले रणनीतिक इलाकों पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों का वीडियो तक जारी कर दिया था। वीडियो में दिखा कि हूती लड़ाके खुले इलाकों और पहाड़ों से एक के बाद एक मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करते हैं। लॉन्चिंग का तरीका ऐसा नजर आता है, मानो किसी गुलेल की तरह प्रोजेक्टाइल को आसमान की ओर दागा जा रहा हो। सऊदी के साथ दो और ताकतवर मुस्लिम देशों की डिफेंस डील के बाद भी हूतियों पर कोई फर्क नहीं पड़ा है, उल्टा उन्होने हमले बढ़ा दिए। अब ये मानना कि डिफेंस डील के बाद सऊदी की मदद के लिए तुर्की और पाकिस्तान आएंगे अंसारुल्लाह के खिलाफ बहुत मुश्किल है। दरअसल, हूतियों के ये हमले सऊदी पर नहीं बल्कि सऊदी के हमलों का पलटवार है प्रतिक्रिया है। ये सीधे सऊदी अरब पर आक्रमण नहीं है बल्कि ये तो सऊदी ब्लॉकेड का जवाब है। जब सऊदी पर पहला हमला हो ही नहीं रहा तो फिर ये देश मदद किस आधार पर करेंगे। वैसे मिडिल ईस्ट की सियासत को समझने वाले कहते हैं कि सऊदी ने हूतियों को छेड़ा ही एक सोची-समझी प्लानिंग के तहत था, वरना साल २०१५-१६ के बाद दोनों में कभी ऐसी जंग नहीं हुई।
यमन के अंसारुल्लाह या हूती की फौजी ताकत और कॉन्फिडेंस अब इतना ज्यादा बढ़ चुका है कि वो सऊदी ड्रोन के यमनी एयरस्पेस में घुसने के जवाब में एक बार सऊदी के नजरान एयरपोर्ट पर और एक बार जिजान रिफाइनरी पर हमला कर चुके हैं। इधर सऊदी ने यमन में एयर स्पेस का वायलेशन किया, उधर सऊदी के इंप्रâास्ट्रक्चर पर सीधा अटैक होता है।
जानकार कहते हैं, ‘मुश्किल है कि सऊदी से डिफेंस डील के बावजूद पाकिस्तान अंसारुल्लाह के खिलाफ सऊदी के लिए अपनी फौजें और हथियार उतारे या तुर्की सीधी मदद को आए। चूंकि अब दुनिया के सामने डील पुख्ता हो गई है और ईरान हिमायती यमन के हूतियों ने रेड सी पर सऊदी के जहाजों के लिए पूरी तरह ब्लॉकेट लगा रखा है तो क्या तीन ताकतवर देशों के साथ यमन को हूतियों से छुड़ाने का वक्त आ गया है? यमन पर किसी भी बड़ी कार्रवाई पर ईरान का क्या एक्शन होता है, ये देखना भी अहम होगा।

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