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प्रशासनिक उदासीनता के चलते ९ साल से सर्वेक्षण से वंचित हैं उत्तन के ५ गांव!

सुरेश गोलानी / मुंबई
मीरा-भायंदर मनपा अंतर्गत आने वाले उत्तन तटीय इलाके के पांच गांव-उत्तन, चौक, पाली, डोंगरी और तारोड़ी के हजारों नागरिक प्रशासनिक उदासीनता के कारण पिछले ९ सालों से नगर भूमापन सर्वेक्षण (सीटीएस) और प्रॉपर्टी कार्ड (मालमत्ता पत्रक) से वंचित हैं।
ज्ञात हो कि मनपा ने २००८ में अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी राजस्व गांवों और गावठनों का सर्वेक्षण करने हेतु निजी एजेंसी की नियुक्ति थी। कार्यादेश के अनुसार मुख्य रूप से नवघर, गोडदेव, खारी, पेड़करपाड़ा, काशी वर्सावे, चेना, लक्ष्मी बाग, घोड़बंदर, उत्तन, चौक, पाली, डोंगरी और तारोड़ी जैसे गांवों और गावठनों का समावेश था। हालांकि, उत्तन, चौक, पाली, डोंगरी और तारोड़ी सहित पांच गांवों के स्थानीय नागरिकों के कड़े विरोध के कारण सर्वेक्षण शुरू नहीं हो सका। नागरिकों द्वारा सहमति दर्शाने के बाद मनपा की महासभा ने २०१८ में इन गांवों का सर्वेक्षण कार्य फिर से शुरू करने का पैâसला लेते हुए इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया। लेकिन एजेंसी ने पुरानी दरों पर सर्वेक्षण करने में असमर्थता जताते हुए संशोधित दर देने का प्रस्ताव रखा, जिसे भूमि अभिलेख विभाग (ठाणे) ने ठुकरा दिया।
हालांकि, तत्कालीन मनपा आयुक्त की मध्यस्थता के बाद एजेंसी पुरानी दरों के अनुसार सर्वेक्षण करने को राजी हुई। एजेंसी ने उच्च-रिजॉल्यूशन कैमरों वाले ड्रोन की सहायता से इन गांवों का भौगोलिक और स्थलाकृतिक डेटा एकत्र कर प्राथमिक सर्वेक्षण रिपोर्ट को सिटी सर्वे विभाग के पास भौतिक सर्वेक्षण की मंजूरी मिलने हेतु भेज दिया, लेकिन इसी बीच शहर का नया डेवलपमेंट प्लान (विकास योजना) का काम शुरू हुआ और हो गया भौतिक सर्वेक्षण की मंजूरी तब से अधर में लटकी हुई है।
मनपा की महासभा में उठा मुद्दा
गुरुवार को नगरसेविका शर्मिला बागाजी ने सर्वेक्षण का मुद्दा मनपा की महासभा में उठाते हुए कहा कि प्रॉपर्टी कार्ड और सीटीएस क्रमांक के अभाव के चलते स्थानीय आगरी-कोलीr नागरिकों को अपनी संपत्ति पर मालिकाना हक्क, भूमि रिकॉर्ड और घरों की मरम्मत/पुनर्निर्माण हेतु जरूरी अनुमतियों को प्राप्त करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा अशिक्षित ग्रामीणों का एक वर्ग, विशेष रूप से आदिवासी और गरीब मछुआरे, भू-माफियाओं के आसान शिकार बन गए हैं। प्रत्येक भूखंड के लिए नगर सर्वेक्षण रिकॉर्ड बनाना और उसे एक विशिष्ट नंबर देना आवश्यक है।

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