-बिना डिग्री चल रहे क्लीनिक, प्रशासन बेखबर
-५ मुन्नाभाई एमबीबीएस गिरफ्तार
-समाज सेवक रशिद शेख का कहना है, ‘स्वास्थ्य हर किसी का मौलिक अधिकार है, खिलौना नहीं। सरकार को चाहिए कि हर ६ महीने में झोपड़पट्टी और चॉल इलाकों में स्पेशल ड्राइव चलाकर फर्जी क्लीनिक पर बुलडोजर चलाया जाए। डिग्री बेचने वाले रैकेट की सीबीआई जांच हो, वर्ना कल कोई और फर्जी डॉक्टर किसी की जान ले सकता है।
फिरोज खान / मुंबई
झाड़फूंक नहीं, अब इलाज के नाम पर सीधा जहर। कई सालों से झोलाछाप डॉक्टर क्लीनिक चला रहे थे, बावजूद इसके मनपा और सरकार सोती रही। जाकिर हुसैन नगर, देवनार और नौपाड़ा में बिना डिग्री, बिना लाइसेंस के क्लीनिक चलाकर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे थे। शिकायत मिलने के बाद ५ फर्जी डॉक्टरों को मुंबई क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है। सवाल ये है कि जब मनपा और स्वास्थ्य विभाग हर साल निरीक्षण का दावा करता है, तो ये बोगस डॉक्टर सालों से वैâसे धंधा चला रहे थे?
क्राइम ब्रांच की यूनिट ६ और यूनिट ८ को पुख्ता जानकारी मिली थी कि देवनार और बांद्रा-ईस्ट में कुछ लोग बिना किसी मेडिकल शिक्षा के क्लीनिक चलाकर मोटी कमाई कर रहे हैं। मनपा के मेडिकल अधिकारियों के साथ मिलकर पुलिस द्वारा की गई छापेमारी में ५ क्लीनिक सील किए गए। मुन्नाभाई एमबीबीएस डॉक्टर सभी मरीजों की जांच कर दवाइयां लिख रहे थे। इनके पास न एमबीबीएस की डिग्री थी, न महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन। बावजूद इसके ये बुखार से लेकर शुगर, बीपी तक का इलाज कर रहे थे। आश्चर्य की बात यह है कि पकड़े गए कुछ बोगस डॉक्टर के पास से फर्जी डिग्रियां मिलीं, जिससे पुलिस और मनपा अधिकारी हैरान हैं।
२०-५० हजार में नकली डिग्री
जांच में सामने आया कि बोगस डॉक्टर ३ रास्ते अपनाते हैं। पश्चिम बंगाल, बिहार और दिल्ली के कुछ इलाकों में २० से ५० हजार रुपए में एमबीबीएस, बीएएमएस की नकली डिग्री और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट बन जाते हैं। व्हॉट्सऐप और फेसबुक पर ‘डॉक्टर बनें ७ दिन में’ जैसे विज्ञापन चलते हैं। कई अस्पतालों में सालों से काम करने वाले कंपाउंडर खुद को ‘अनुभवी डॉक्टर’ बताकर क्लीनिक खोल लेते हैं। किसी असली डॉक्टर का क्लीनिक बंद होने पर उसका बोर्ड और नाम इस्तेमाल कर धंधा शुरू कर देते हैं।
सरकार और मनपा क्यों बेखबर?
सबसे बड़ा सवाल जवाबदेही का है। मनपा के पास झोपड़पट्टी इलाकों में क्लीनिक की कोई पुख्ता मैपिंग नहीं है। स्वास्थ्य विभाग का निरीक्षण कागजों तक सीमित है। महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल शिकायत आने पर ही कार्रवाई करती है। आरटीआई से पता चला कि पिछले ३ साल में मुंबई में सिर्फ ४२ बोगस डॉक्टरों पर कार्रवाई हुई, जबकि अनुमान २,००० से ज्यादा का है।
