मुख्यपृष्ठनए समाचारभुजबल-भुसे की दावेदारी के बीच महाजन की ‘गुपचुप’ ताजपोशी?

भुजबल-भुसे की दावेदारी के बीच महाजन की ‘गुपचुप’ ताजपोशी?

-कुंभ पुस्तिका में पालकमंत्री का उल्लेख, महायुति में खलबली

सुनील ओसवाल / मुंबई

नासिक के पालकमंत्री पद को लेकर महायुति के भीतर चल रही खींचतान के बीच ‘सिंहस्थ कुंभपर्व’ की एक पुस्तिका ने महाराष्ट्र की सियासत में नया सवाल खड़ा कर दिया है। पुस्तिका में मंत्री गिरीश महाजन के नाम के साथ सीधे ‘पालकमंत्री एवं कुंभपर्व मंत्री’ लिखा गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार ने पालकमंत्री पद पर महाजन की औपचारिक घोषणा किए बिना ही कोई अंदरूनी पैâसला कर लिया है?
सिंहस्थ कुंभपर्व की इस पुस्तिका के पिछले पृष्ठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, दोनों उप मुख्यमंत्रियों और मंत्री गिरीश महाजन के फोटो प्रकाशित किए गए हैं। महाजन के फोटो के नीचे उन्हें पालकमंत्री एवं कुंभपर्व मंत्री बताया गया है। यही एक उल्लेख अब महायुति के भीतर चल रही पालकमंत्री पद की खींचतान को फिर से चर्चा के केंद्र में ले आया है।
महायुति सरकार के सत्ता में आने के बाद से नाशिक और रायगड के पालकमंत्री पद को लेकर विवाद बना हुआ है। भाजपा, अजीत पवार गुट और शिंदे गुट के बीच दोनों जिलों के पालकमंत्री पद को लेकर सहमति नहीं बन सकी है।
नासिक का मामला और भी संवेदनशील है, क्योंकि अगले वर्ष होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के कारण इस जिले के पालकमंत्री पद का राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व कई गुना बढ़ गया है। ऐसे में अगर आधिकारिक रूप से पालकमंत्री नियुक्त नहीं हुआ है तो सरकारी पुस्तिका में गिरीश महाजन को ‘पालकमंत्री’ किस आधार पर बताया गया? यही सवाल अब राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गया है।
क्या यह ‘छुपी हुई नियुक्ति’ का संकेत है?
महाजन पहले से ही सिंहस्थ कुंभमेले की तैयारियों के लिए कुंभपर्व मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। कुंभ से जुड़े पैâसलों और बैठकों में उनकी सक्रिय भूमिका भी दिखाई देती है। ऐसे में पुस्तिका में उनके नाम के साथ ‘पालकमंत्री’ जोड़ दिया जाना महज छपाई की गलती है या इसके पीछे सरकार का कोई निर्णय है, यह सवाल अब उठने लगा है।
क्या सरकार ने महायुति के भीतर चल रहे विवाद को टालने के लिए महाजन की नियुक्ति को सार्वजनिक नहीं किया? या फिर पुस्तिका तैयार करनेवाली व्यवस्था से गंभीर चूक हुई है? इन दोनों संभावनाओं को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
भुजबल और भुसे की दावेदारी का क्या?
नासिक के पालकमंत्री पद के लिए दादा गुट के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल और शिंदे गुट के दादा भुसे के नाम भी चर्चा में रहे हैं। वहीं भाजपा की ओर से गिरीश महाजन पहले से ही सिंहस्थ की तैयारियों की कमान संभाल रहे हैं।
यही वजह है कि पुस्तिका में महाजन को पालकमंत्री बताए जाने को केवल एक सामान्य उल्लेख मानने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अगर यह सरकार की ओर से अनजाने में सामने आया कोई संकेत है तो इसका सीधा असर महायुति के भीतर चल रही सत्ता-समीकरण की बातचीत पर पड़ सकता है।
रायगड भी बना हुआ है पेच
पालकमंत्री पद को लेकर केवल नासिक ही नहीं, रायगड का मामला भी महायुति के लिए लंबे समय से पेचीदा रहा है। दोनों जिलों को लेकर तीनों सहयोगी दलों के बीच सहमति का अभाव सत्ता के भीतर की खींचतान को उजागर करता रहा है।
ऐसे माहौल में नासिक की सरकारी पुस्तिका में गिरीश महाजन को पालकमंत्री लिख दिया जाना कई सवाल खड़े करता है। सरकार ने महाजन को सचमुच पालकमंत्री नियुक्त कर दिया है और घोषणा रोक रखी है या फिर पुस्तिका में गलती से यह पदनाम छप गया? फिलहाल, आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है, लेकिन कुंभ की तैयारियों से जुड़ी एक पुस्तिका ने पालकमंत्री पद के पुराने विवाद में नया राजनीतिक अध्याय जरूर खोल दिया है।

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