रूस-यूक्रेन युद्ध और भू-राजनीतिक तनावों के बीच जर्मनी ने रक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अपनी सेना को मजबूत करने के लिए १०० अरब यूरो के विशेष कोष और रक्षा बजट बढ़ाने की घोषणा के बाद, अब जर्मन सरकार अपनी खुफिया एजेंसियों को आधुनिक और अधिक शक्तिशाली बनाने में जुट गई है।
खुफिया तंत्र में सुधार के मुख्य पहलू
नए अधिकार और साइबर हमले रोकने की क्षमता:
कैबिनेट द्वारा स्वीकृत व्यापक सुधारों के तहत जर्मन विदेश खुफिया एजेंसी (बीएनडी) और घरेलू खुफिया एजेंसी (बीएफवी) को डिजिटल सुरक्षा के नए अधिकार दिए जा रहे हैं। अब ये एजेंसियां साइबर हमलों के दौरान हमलावरों के आईटी सिस्टम को निष्क्रिय कर सकती हैं।
विदेशों में कार्रवाई और आत्मरक्षा:
तनाव या विशेष सुरक्षा संकट की स्थिति में बीएनडी को विदेशों में डेटा डिलीट करने या हेरफेर करने जैसे साइबर ऑपरेशन्स चलाने की छूट दी गई है। साथ ही, बीएनडी अधिकारियों को विदेशों में आत्मरक्षा के लिए बिना किसी विशेष इजाजत के हथियार ले जाने की अनुमति होगी।
एआई और व्यापक डेटा विश्लेषण:
एजेंसियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग करके डेटा विश्लेषण करने, ऑनलाइन सर्च बढ़ाने और संदिग्धों के मूवमेंट प्रोफाइल तैयार करने की शक्तियां दी गई हैं।
जर्मनी के इस कदम के कारण
रूस से बढ़ता खतरा: यूरोपीय सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, जर्मनी को रूसी जासूसी, साइबर हमलों और दुष्प्रचार अभियानों का लगातार सामना करना पड़ रहा है।
हाइब्रिड वॉरफेयर: पारंपरिक युद्ध के बजाय अब साइबर हमलों और बुनियादी ढांचे पर तोड़फोड़ का खतरा बढ़ गया है, जिससे निपटने के लिए केवल मजबूत सेना काफी नहीं है।
चिंताएं और निगरानी
हालांकि, व्यापक ऑनलाइन निगरानी और निजी परिसरों की निगरानी बढ़ाने को लेकर नागरिक अधिकारों से जुड़े संगठनों ने चिंता जताई है। इसके जवाब में सरकार ने २०२२ में गठित ‘इंडिपेंडेंट ओवरसाइट काउंसिल’ के जरिए खुफिया एजेंसियों की निगरानी को और मजबूत करने का आश्वासन दिया है।
जर्मनी अपनी दशकों पुरानी रक्षात्मक नीति से बाहर निकलकर ‘जाईटेनवेंडे’ (सुरक्षा नीति में ऐतिहासिक बदलाव) के तहत न केवल सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है, बल्कि खुफिया तंत्र को भी आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार कर रहा है।
