मुख्यपृष्ठस्तंभसीधा सवाल: लाइफ लाइन या हादसों की मेट्रो?

सीधा सवाल: लाइफ लाइन या हादसों की मेट्रो?

-निर्माणाधीन मेट्रो-९ पर हादसों का सिलसिला जारी
-भायंदर की सड़क पर गिरा पत्थर, स्कूल वैन में सवार विद्यार्थी बाल-बाल बचे

सुरेश गोलानी

मीरा-भायंदर में रहने वाले लाखों नागरिकों के लिए नई जीवन रेखा (लाइफ लाइन) के रूप में देखी जाने वाली दहिसर-भायंदर मेट्रो-९ रेल लाइन (फेज-२) भी मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) के ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य के दौरान बरती जा रही कथित लापरवाही के कारण ‘हादसों की मेट्रो’ बनती जा रही है।
सोमवार सुबह करीब ११:३० बजे मीरा-भायंदर रोड पर स्थित दीपक अस्पताल के पास बन रहे नानासाहेब धर्माधिकारी मेट्रो स्टेशन के निर्माण कार्य के दौरान अचानक एक बड़ा पत्थर/स्लैब ऊंचाई से नीचे गिरा। उसके टुकड़े सड़क से गुजर रही स्कूली छात्रों को ले जा रही एक मिनी वैन के पास जा गिरे। अचानक हुए इस घटनाक्रम के कारण चालक का नियंत्रण छूटा और जोरदार झटके के बाद वैन के पिछले टायर की हवा निकल गई। वैन कुछ दूर तक जाने के बाद कर्कश आवाज के साथ रुक गई। गनीमत रही कि सभी विद्यार्थी पूरी तरह सुरक्षित रहे और किसी को कोई चोट नहीं आई।
हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर मेट्रो निर्माण स्थलों पर ठेकेदार की कार्यप्रणाली और सुरक्षा उपायों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ज्ञात हो कि दहिसर-भायंदर मेट्रो-९ रेल लाइन के निर्माण कार्य के दौरान घटित यह पहला हादसा नहीं है। दहिसर-भायंदर मेट्रो-९ सहित विभिन्न मेट्रो निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते पहले भी कई गंभीर हादसे हो चुके हैं। दहिसर-भायंदर मेट्रो-९ रेल लाइन की बात करें तो इसके निर्माण कार्य के दौरान सामान्य नागरिकों और मजदूरों को ४० से ज्यादा खतरनाक हादसों का सामना करना पड़ा है।
अब तक के हादसों में ५ लोगों की मौत
सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदन के तहत मिले जवाब में एमएमआरडीए ने यह कबूल किया था कि दहिसर-भायंदर मेट्रो-९ रेल लाइन के निर्माण कार्य की शुरुआत (९ सितंबर २०१९) से अब तक कुल पांच लोगों की मौत हो चुकी है।
इसके अलावा, एमएमआरडीए द्वारा दिए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इसी अवधि में ४० खतरनाक हादसे, एक गैर-घातक घटना, ७३ निकट-चूक (नीयर मिस) की घटनाएं, जिनमें कोई नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन होने की संभावना थी, २३ अन्य दुर्घटनाएं और १८६ प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) के मामले सामने आए। इनमें दुर्घटना में लगी चोट के तुरंत बाद दी जाने वाली चिकित्सा सहायता शामिल है।
क्या लोगों की जान सस्ती है?
ज्ञात हो कि दहिसर-भायंदर मेट्रो-९ रेल लाइन के निर्माण के लिए एमएमआरडीए ने जे. कुमार नामक कंपनी को ठेका दिया है। ठेकेदार की लापरवाही के खिलाफ लगातार आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णा गुप्ता कहते हैं, ‘एमएमआरडीए द्वारा लाखों रुपए का जुर्माना थोपे जाने के बावजूद ठेकेदार सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने से बाज नहीं आ रहा है। लगातार हो रहे हादसों और बेकसूर लोगों की मौत के बावजूद पुलिस ने आज तक परियोजना प्रबंधक को कभी किसी मामले में आरोपी नहीं बनाया। क्या लोगों की जान इतनी सस्ती है?’
हाल ही में हुई बारिश के दौरान मेट्रो ठेकेदार द्वारा मीरा रोड में किए गए घटिया गुणवत्ता वाले सिविल निर्माण कार्य का मामला भी सामने आया था। मीरा रोड स्थित मैकडोनाल्ड के पास से गुजरने वाली एलिवेटेड मेट्रो रेल लाइन-९ के नीचे सड़क के बीच पौधों से सुसज्जित ट्रैफिक आइलैंड की बाउंड्री पर लगे कंक्रीट ब्लॉक (कर्ब स्टोन) कुछ ही समय की बारिश के कारण आंशिक रूप से ढह गए थे। इस घटना ने ठेकेदार द्वारा किए गए काम और कथित तौर पर इस्तेमाल की गई घटिया सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए थे।
इसके बाद एमएमआरडीए ने परियोजना के सलाहकार को दोबारा ऐसी घटना न हो, इसके लिए आवश्यक उपाययोजना करने की हिदायत दी थी और हुई घटना के लिए ठेकेदार पर जुर्माना लगाया था। मेट्रो लाइन-९ के फेज-२ का काम अंतिम चरण में है और इसी महीने इस पर ट्रायल रन भी शुरू हो चुका है। ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल और भी गंभीर हो जाते हैं।
क्या कहना है एमएमआरडीए का?
इस मामले में एमएमआरडीए द्वारा जारी स्पष्टीकरण में दावा किया गया है कि क्रेन की मदद से सामग्री हटाते समय रखी गई टोकरी गलती से एफओबी क्षेत्र में रखे ग्रेनाइट पत्थरों से टकरा गई। परिणामस्वरूप कुछ ग्रेनाइट पत्थर नीचे बैरिकेड किए गए क्षेत्र में गिर गए। सुरक्षा संबंधी इस चूक का गंभीर संज्ञान लेते हुए परियोजना के ठेकेदार जे. कुमार इंप्रâाप्रोजेक्ट्स लिमिटेड, आर्किटेक्चरल फिनिशिंग ठेकेदार एन. ए. गजानन और परियोजना के जनरल कंसल्टेंट सिस्ट्रा-सीईजी पर क्रमशः १० करोड़, १.५ करोड़ और १ करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है।

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