मुख्यपृष्ठनए समाचारमनपा की ‘टनल’ योजना मुंबई के पर्यावरण पर संकट!

मनपा की ‘टनल’ योजना मुंबई के पर्यावरण पर संकट!

-गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड टनल प्रोजेक्ट पर उठे सवाल
-संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के नीचे सुरंग से पहले सुरक्षा पर उठे सवाल
-विकास की कीमत जंगल और मुंबईकर क्यों चुकाएं?

सामना संवाददाता / मुंबई
मनपा प्रशासन भले ही गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड परियोजना के तहत टनल खोदने की प्रक्रिया शुरू होने का ढिंढोरा पीट रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि यह परियोजना मुंबई की पर्यावरण व्यवस्था और जनता के पैसों के प्रबंधन पर कई बड़े सवाल खड़े करती है। १७ अगस्त २०२६ से टनल बोरिंग मशीन तुलसी के जरिए संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के नीचे ५.३० किलोमीटर लंबी सुरंग खोदने का काम शुरू करने का दावा किया गया है, पर इस कदम से उत्पन्न होने वाले खतरों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
इतने बड़े बजट और तामझाम के बावजूद अब तक इस परियोजना की भौतिक प्रगति महज २१ प्रतिशत ही हो पाई है। जहां टीबीएम -१ को शुरू करने की बात कही जा रही है, वहीं टीबीएम -२ का असेंबली कार्य अब भी अधर में लटका है और उसका काम अक्टूबर २०२६ तक टल गया है। परियोजना को पूरा करने की अंतिम तिथि फरवरी २०२९ रखी गई है, जिसका सीधा मतलब है कि मुंबईकरों को आने वाले वर्षों तक धूल, ट्रैफिक डायवर्जन और निर्माण संबंधी परेशानियों से जूझना पड़ेगा।
पर्यावरण पर मंडराता संकट और अधूरा ढांचा
प्रशासन का दावा है कि राष्ट्रीय उद्यान के नीचे काम करने से जैव विविधता को नुकसान नहीं होगा, लेकिन घने जंगलों और संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र के नीचे भारी मशीनरी चलाना किसी बड़े खतरे से खाली नहीं है। निर्माण कार्य और ड्रिलिंग गतिविधियों से भूमिगत जल स्रोतों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की प्रबल आशंका है। इसके अलावा, इस परियोजना की गति और कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में है।

अन्य समाचार