-सीएम साहब कौन ले रहा अवैध कर?
-शिवसेना प्रवक्ता के सवाल से घिरी सरकार
-१५० प्रति वर्गफुट `रुमाल टैक्स’
रामदिनेश यादव / मुंबई
महाराष्ट्र में इन दिनों उद्योग क्षेत्र बुरे दौर से गुजर रहा है। उद्योग क्षेत्र को सरकार की अव्यवस्थाओं के चलते भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है ऐसे में कई उद्योजक अब राज्य छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। इधर एमआईडीसी में उद्योग के लिए कंपनियों को जमीन देने के बदले उद्योग विभाग के कुछ अधिकारियों और मंत्री के तथाकथित करीबियों के द्वारा अवैध रूप से कर वसूले जाने का आरोप लग रहा है। सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय के पास एक्सप्रेस टावर में बैठकर एमआईडीसी में उद्योग के लिए जमीन देने का सौदा किया जाता है और इस सौदा के लिए एक अधिकारी के द्वारा ‘रुमाल टैक्स’ वसूला जाता है। शिवसेना के प्रवक्ता व शिवसंचार सेना के प्रमुख अखिल चित्रे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मामले में तत्काल जांच कराने की मांग करते हुए दावा किया है कि राज्य में उद्योग शुरू करने के लिए उद्यमियों से कथित तौर पर अनधिकृत ‘रुमाल टैक्स’ वसूला जा रहा है। आरोप है कि यह रकम प्रति वर्गफुट १५० रुपए के हिसाब से ली जा रही है।
चित्रे ने मुख्यमंत्री से सीधे सवाल करते हुए कहा कि चाकण के औद्योगिक मुद्दे और राज्य में उद्योगों को लेकर इतनी चिंता दिखाई जा रही है, लेकिन दूसरी तरफ महाराष्ट्र में नया उद्योग शुरू करने के लिए कथित तौर पर ‘रुमाल टैक्स’ देना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को इस पूरे मामले की एक्सप्रेस टावर में होने वाले बैठकों को लेकर जांच करानी चाहिए। इस मामले में जो भी लोग शामिल हैं सब सामने आ जाएगा।
१५० रुपए प्रति वर्गफुट कौन ले रहा है?
सूत्रों के मुताबिक, उद्योग स्थापित करने के लिए प्रति वर्गमीटर १,५०० रुपए यानी करीब १५० रुपए प्रति वर्गफुट की राशि कथित तौर पर अनधिकृत रूप से वसूली जा रही है। इसी दावे को लेकर शिवसेना के चित्रे ने सरकार के सामने कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा कि यह कथित ‘रुमाल टैक्स’ कौन वसूल रहा है? यह पैसा किसके लिए लिया जा रहा है? और सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इससे जुड़े उद्योग किसी मंत्री के संरक्षण में चल रहे हैं?
उद्योग लाने की होड़ या भगाने की तैयारी?
अखिल चित्रे ने सरकार की औद्योगिक नीति पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल किया कि महाराष्ट्र में उद्योग की दशा खराब हो रही है। फिर भी सीएम देशभर से उद्योगों को आकर्षित करने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन उसी विभाग के लोगों द्वारा अवैध वसूली के जरिए उद्योगों को राज्य से बाहर जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है?
