सामना संवाददाता / नई दिल्ली
अभिनेता प्रकाश राज ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी राजनीति पर तीखा हमला बोला है। प्रकाश राज ने कहा, ‘दिमागी बनो, बेवकूफ नहीं। अंधभक्त नहीं। सवाल करो, गुलामी नहीं।’ उनका यह बयान सीधे उस राजनीतिक संस्कृति पर प्रहार के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें नेताओं से सवाल पूछने के बजाय उनका अंधसमर्थन करने के आरोप लगते रहे हैं।
लोकतंत्र में नेता भगवान नहीं होता
प्रकाश राज लंबे समय से मोदी सरकार की नीतियों और भाजपा की राजनीति के मुखर आलोचक रहे हैं। उनका ताजा संदेश भी इसी तेवर में है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में नेता भगवान नहीं होता और समर्थक भक्त नहीं, बल्कि सवाल पूछने वाला नागरिक होता है। प्रकाश राज का निशाना केवल प्रधानमंत्री पर ही नहीं, बल्कि उस समर्थक वर्ग पर भी दिखाई देता है, जो राजनीतिक नेतृत्व की हर बात को बिना तर्क और बिना सवाल स्वीकार कर लेता है। उनके बयान का मूल संदेश साफ है, राजनीति में आस्था नहीं, जवाबदेही चाहिए; जयकार नहीं, सवाल चाहिए। अब इस बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो सकती है, क्योंकि प्रकाश राज ने बेहद कम शब्दों में वही सवाल खड़ा कर दिया है, जो भारतीय राजनीति में लंबे समय से बहस का विषय रहा है, क्या सत्ता से सवाल करना लोकतंत्र की ताकत है या सत्ता-विरोध?
