सामना संवाददाता / नई दिल्ली
भाजपा की सोशल मीडिया मशीनरी का करीब ११ वर्षों तक चेहरा रहे अमित मालवीय की आईटी सेल प्रमुख पद से विदाई ने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम में मालवीय की जगह दीपक म्हास्के को आईटी और सोशल मीडिया की कमान सौंपी गई है। लेकिन इस बदलाव को विपक्ष और सरकार-विरोधी सोशल मीडिया खेमे ने सीधे ‘कॉकरोच आंदोलन’ के असर से जोड़कर चुटकी लेना शुरू कर दिया है।
सरकार तो नहीं गिरा पाए, कुर्सी कुतर गए कॉकरोच!
डिजिटल मैदान पर भी भाजपा पर भारी पड़े युवा
जिस भाजपा आईटी सेल को वर्षों से सोशल मीडिया नैरेटिव गढ़ने की सबसे ताकतवर राजनीतिक मशीन माना जाता रहा है, उसी डिजिटल मैदान पर हाल के महीनों में युवा नेतृत्व वाले ‘कॉकरोच’ आंदोलन ने सरकार और भाजपा को कड़ी चुनौती दी।
आंदोलन शिक्षा, पेपर लीक और रोजगार के सवालों से उठा और आखिरकार तत्कालीन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक पहुंचा। अब मालवीय की विदाई पर विरोधी खेमा व्यंग्य कर रहा है,‘कॉकरोच सरकार तो नहीं गिरा पाए, लेकिन आईटी सेल प्रमुख की कुर्सी जरूर कुतर गए!’ सियासी तंज इससे भी आगे है,‘मोदी किसी के नहीं। जब तक आप उपयोगी हैं, तब तक महत्वपूर्ण हैं; अहमियत खत्म तो पद खत्म।’ हालांकि, भाजपा ने मालवीय को हटाने के पीछे ऐसी कोई वजह नहीं बताई है। यह व्यापक संगठनात्मक फेरबदल का हिस्सा है और नए अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम में कई पुराने चेहरों की जगह नए लोगों को जिम्मेदारी दी गई है।
फिर भी सवाल दिलचस्प है,क्या भाजपा को अब अपनी उस डिजिटल रणनीति की धार कुंद होती दिखाई देने लगी है, जो एक दशक तक उसकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत रही?
