मुख्यपृष्ठनए समाचारशिवसेना की अगुवाई में नासिक में गड्ढों के खिलाफ भारी जनाक्रोश

शिवसेना की अगुवाई में नासिक में गड्ढों के खिलाफ भारी जनाक्रोश

-गड्ढों से हुए हादसों में मौतें हत्या ही हैं!
-मनपा और महाजन के खिलाफ हत्या के मामले दर्ज करें!!
सामना संवाददाता/ मुंबई
नासिक शहर को ‘गड्ढों’ में धकेलने और दस निर्दोष नागरिकों की मौत के लिए जिम्मेदार मनपा के लापरवाह कामकाज के खिलाफ कल जबरदस्त जनआक्रोश देखने को मिला। सत्तारूढ़ भाजपा के भ्रष्ट और लापरवाह प्रशासन का जवाब मांगने के लिए शिवसेना नेता और सांसद संजय राऊत के नेतृत्व में विशाल मोर्चा मनपा मुख्यालय पर पहुंचा। इस मोर्चे में शिवसैनिकों के साथ हजारों नासिककर भी शामिल हुए। सत्ताधारियों के खिलाफ लगाए गए नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।

महाजन को हटाओ, नासिक बचाओ!
संजय राऊत की मांग को जोरदार समर्थन
नासिक मनपा पर निकाले गए मोर्चे का नेतृत्व करते हुए शिवसेना सांसद संजय राऊत ने कहा कि गड्ढों के कारण हुए हादसों में होने वाली मौतें हत्या ही हैं। इसके लिए जिम्मेदार मनपा और कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन के खिलाफ हत्या के मामले दर्ज किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि महाजन हटाओ, नासिक बचाओ। नासिक के नागरिकों ने भी इस मांग को जोरदार समर्थन दिया।
मोर्चे की शुरुआत शालिमार स्थित शिवसेना के केंद्रीय कार्यालय से हुई। इसमें महिलाओं और युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। सत्ताधारियों के विरोध में अधिकांश प्रदर्शनकारियों ने काले कपड़े पहने थे। काम में भ्रष्टाचार, सड़कों पर गड्ढे, इसका जिम्मेदार कौन?, अधिकारियों की कुर्सी हिलाओ, नासिक बचाओ, सड़कें खराब, प्रशासन बेहाल, सरकार कहां है?, गड्ढे खोल रहे विकास की पोल, निष्क्रिय सत्ताधारियों को हटाओ, नासिक बचाओ और नासिककरों का धैर्य खत्म, जनआक्रोश हुआ जैसे नारों वाले पोस्टर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे थे। मोर्चा सीबीएस होते हुए मनपा के राजीव गांधी भवन स्थित मुख्यालय पहुंचा।
महानगरपालिका के प्रवेश द्वार पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए संजय राऊत ने सत्ताधारियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे के आदेश पर निकाला गया यह मोर्चा नासिककरों की जिंदगी के गड्ढे भरने के लिए है। यदि सत्ताधारियों और आयुक्त के अंदर संवेदनाएं बची हैं, तो उन्हें मोर्चे के मंच पर आकर ज्ञापन स्वीकार करना चाहिए।
राऊत ने तंज कसते हुए कहा कि इस मोर्चे में हमने यमराज को भी बुलाया है। अब नागरिकों की बलि नहीं दी जानी चाहिए। मनपा में बैठे भ्रष्ट और संवेदनहीन लोगों पर कार्रवाई का डंडा चलाना चाहिए। उन्होंने सत्तारूढ़ भाजपा और शिंदे गुट पर भी निशाना साधते हुए कहा कि हम जनता के लिए कर्तव्य भावना से सड़क पर उतरे हैं, जबकि सत्तारूढ़ भाजपा और मिंधे गुट घरों में छिपकर बैठे हैं। इस दौरान संजय राऊत ने गड्ढों के कारण हुए हादसों में जान गंवाने वाले नागरिकों के नाम भी पढ़कर सुनाए।
अयोध्या के प्रभु राम को नहीं छोड़ा, वे पंचवटी के राम को क्या छोड़ेंगे?
संजय राऊत ने चेतावनी देते हुए कहा कि नासिक शहर कब गड्ढा मुक्त होगा इसका टाइमलाइन बताएं। सत्ताधारी इसकी समय-सीमा घोषित करें, अन्यथा शिवसेना फिर मनपा पर धावा बोलेगी और शिवसैनिक गेट तोड़कर अंदर घुसेंगे। इस दौरान जिला संपर्क उपनेता रवींद्र मिर्लेकर, सांसद राजाभाऊ वाजे, जिलाध्यक्ष डी.जी. सूर्यवंशी और मनपा के नेता प्रतिपक्ष केशव पोरजे ने भी सभा को संबोधित किया।

सत्ताधारी नगरसेवकों को गड्ढे में डालो

संजय राऊत ने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि मखमलाबाद की सड़क पर स्विमिंग पूल जैसे गड्ढे हो गए हैं। इन गड्ढों में भाजपा और शिंदे गुट के नगरसेवकों को डाल देना चाहिए। ये सभी पचास खोखे वाले हैं, इन्हें पचास करोड़ मिलते हैं। लेकिन घायलों और मृतकों के परिजनों को केवल दो-पांच लाख रुपये दिए जाते हैं। संजय राऊत ने कहा कि भाजपा के लोगों ने अयोध्या के मंदिर की दानपेटी लूट ली। सीतामाता के आभूषण और मंगलसूत्र तक लूट लिए। उसी भाजपा की औलाद नासिक को भी लूट रही है। जिन्होंने अयोध्या के प्रभु राम को नहीं छोड़ा, वे पंचवटी के राम को क्या छोड़ेंगे?
अब शौचालय के पैसे भी खाने लगे
मोर्चे से पहले आयोजित पत्रकार परिषद में संजय राऊत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पालकमंत्री गिरीश महाजन पर भी निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि क्या मुख्यमंत्री को यह याद नहीं रहा कि उन्होंने नासिक को गोद लिया है? उन्होंने कहा कि जब नागरिक समस्याओं से परेशान हैं, तब सरकार कुंभकर्ण की भूमिका में है। यहां के पालकमंत्री और कुंभ मेला मंत्री को कुंभकर्ण मंत्री कहना चाहिए। राऊत ने आरोप लगाया कि कुंभ मेले का बजट १५ हजार करोड़ रुपये से बढ़कर ४५ हजार करोड़ रुपये हो गया है। अब ५५ हजार शौचालय बनाए जाने हैं, जिनमें १० हजार वीआईपी शौचालय होंगे। यह क्या मामला है? ये लोग अब शौचालयों के पैसे भी खाने लगे हैं।
शिवसेना की प्रमुख मांगें
शहर के सभी गड्ढे तत्काल भरे जाएं
-अधूरे और घटिया काम के लिए जिम्मेदार अधिकारियों तथा ठेकेदारों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाएं।
-गड्ढों के कारण हुए हादसों और मौतों की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक की जाए।
-प्रत्येक वार्ड की सड़कों का निरीक्षण कर खतरनाक स्थानों की सूची सार्वजनिक की जाए।
-गड्ढे भरने के लिए निश्चित समय-सीमा घोषित की जाए।
-सड़कों के काम की गुणवत्ता की जांच के लिए स्वतंत्र तकनीकी दल नियुक्त किया जाए।
-गड्ढों के कारण हादसों में जान गंवाने वाले प्रत्येक मृतकों के परिजनों को १ करोड़ रुपये और घायलों को ५० लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।

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