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लीज तो बहाना है…असल में बिल्डरों की झोली में बेस्ट डिपो की जमीन डालना है

 – २५ बेस्ट डिपो पर बनेंगे मॉल और होटल्स?
-शिवसेना ने मनपा प्रशासन पर साधा निशाना

जेदवी / मुंबई

मुंबई की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली बेस्ट के २४ डिपो को ६० साल की लीज पर देने के प्रस्ताव ने राजनीतिक विवाद को गरमा दिया है। मुंबई मनपा के इस प्रस्ताव के खिलाफ शिवसेना ने मोर्चा खोलते हुए प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। पूर्व महापौर एवं शिवसेना नेता किशोरी पेडणेकर ने सवाल उठाया है कि बेस्ट को आर्थिक संकट से बाहर निकालने के नाम पर उसकी बेशकीमती जमीनें छह दशक के लिए निजी हाथों में सौंपना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि लीज पर देना तो एक बहाना है ये जमीनें बिल्डरों की झोली में डालना है। इन जगहों को बाद में ९० साल और फिर आगे लीज बढ़ाते रहेंगे।
पेडणेकर ने आशंका जताई कि आज डिपो की जमीनें लीज पर दी जाएंगी और कल इन्हीं भूखंडों पर मॉल या अन्य व्यावसायिक इमारतें बनाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि मुंबई की सार्वजनिक संपत्ति को लंबी अवधि की लीज पर देने का पैâसला भविष्य में मनपा के लिए ही परेशानी का कारण बन सकता है। उनके मुताबिक, मनपा की जमीनें एक बार ९९ या १०० साल की लीज पर जाने के बाद वापस हासिल करना आसान नहीं रहा है। ऐसे में ६० साल की लीज भी आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकती है।
पेडणेकर ने बेस्ट कर्मचारियों की ग्रेच्युटी का मुद्दा भी उठाया, लेकिन उनकी ग्रेच्युटी चुकाने के लिए बेस्ट की जमीनों को लीज पर देना कोई स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पूर्व में शिवसेना-भाजपा सत्ता के दौरान करीब १,००० करोड़ रुपए का अनुदान देकर बेस्ट को आर्थिक संकट से उबारने का प्रयास किया गया था। उन्होंने सवाल किया कि जब आर्थिक संकट से निपटने के लिए सरकारी सहायता और अलग वित्तीय योजना का विकल्प मौजूद है तो बेस्ट की जमीनों को छह दशक के लिए सौंपने की जरूरत क्यों पड़ रही है? शिवसेना ने मांग की है कि बेस्ट को मजबूत करने के लिए दीर्घकालीन आर्थिक योजना बनाई जाए, न कि उसकी जमीनों को निजी हितों के लिए इस्तेमाल करने का रास्ता खोला जाए।
६० साल की लीज पर सवाल
बेस्ट के २४ डिपो को ६० साल की लीज पर देने के प्रस्ताव का शिवसेना ने विरोध किया है। किशोरी पेडणेकर ने आरोप लगाया कि आर्थिक संकट का बहाना बनाकर बेशकीमती जमीनें निजी हाथों में सौंपने की तैयारी है। उन्होंने भविष्य में यहां मॉल और व्यावसायिक इमारतें बनने की आशंका जताई।

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