-तारिक रहमान की भारत यात्रा ‘यादगार’ बनाना चाहते हैं मोदी
-अल्पसंख्यकों की हत्याओं के बीच भारतीय उच्चायुक्त के बयान पर उठे सवाल
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हिंसा और हत्याओं को लेकर भारत में लगातार चिंता के बीच अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा को ‘यादगार’ बनाने की इच्छा जताए जाने की खबर ने नया राजनीतिक सवाल खड़ा कर दिया है।
बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने कहा है कि मोदी चाहते हैं कि रहमान का प्रस्तावित भारत दौरा यादगार हो और दोनों नेताओं के बीच बेहतर संबंधों से दोनों देशों के नागरिकों तथा कारोबार को फायदा मिलेगा। त्रिवेदी ने यह भी कहा कि दोनों देशों के मतभेद बातचीत से ही सुलझाए जा सकते हैं। लेकिन इस कूटनीतिक गर्मजोशी के बीच सबसे असहज सवाल बांग्लादेश के हिंदुओं की सुरक्षा का है।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हिंसा का कहर!
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, सत्ता परिवर्तन के बाद २,००० से ज्यादा सांप्रदायिक घटनाएं दर्ज हुर्इं। इन घटनाओं ने नई सरकार के सामने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और दोषियों पर कार्रवाई की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में हिंदू समुदाय ने व्यापक हिंसा, हत्याओं और धार्मिक स्थलों पर हमलों की शिकायत की है।
बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद के आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में २,००० से ज्यादा सांप्रदायिक घटनाएं, ६१ हत्याएं और करीब १०० धार्मिक स्थलों पर हमले दर्ज किए गए। हालांकि, इन हत्याओं को सीधे तारिक रहमान के आदेश पर हुई ‘टारगेट किलिंग’ कहना उपलब्ध विश्वसनीय साक्ष्यों से सिद्ध नहीं है। हिंसा का बड़ा हिस्सा उनके प्रधानमंत्री बनने से पहले के राजनीतिक संक्रमण काल से भी जुड़ा है। इसलिए सवाल रहमान को हत्याओं का ‘मास्टरमाइंड’ बताने का नहीं, बल्कि यह है कि उनकी सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और दोषियों पर कार्रवाई को लेकर क्या ठोस गारंटी देती है। दिलचस्प रूप से रहमान ने स्वयं सभी धर्मों के लोगों के लिए सुरक्षित बांग्लादेश बनाने की बात कही है, जबकि नई दिल्ली के लिए अल्पसंख्यकों की सुरक्षा द्विपक्षीय रिश्तों का संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। भारत-बांग्लादेश संबंध वैसे भी शेख हसीना के भारत में रहने और ढाका द्वारा उनके प्रत्यर्पण की मांग को लेकर तनावपूर्ण हैं।
‘यादगार’ दौरे से पहले ये सवाल भी पूछिए
क्या हिंदुओं पर हमलों के मामलों में दोषियों को सजा मिली?
मंदिरों और अल्पसंख्यक बस्तियों की सुरक्षा की क्या गारंटी है?
भारत क्या रहमान के सामने यह मुद्दा औपचारिक रूप से उठाएगा?
कूटनीति में पड़ोसी से बातचीत जरूरी है, लेकिन सवाल यह भी है कि भारत अगर रहमान के स्वागत को यादगार बनाएगा, तो क्या बांग्लादेश के पीड़ित हिंदुओं का दर्द भी उस बातचीत की मेज पर उतनी ही मजबूती से रखा जाएगा?
