मुख्यपृष्ठनए समाचारआपदा में जनता बेहाल... पीएम केयर्स का खजाना मालामाल!

आपदा में जनता बेहाल… पीएम केयर्स का खजाना मालामाल!

-८,४५२ करोड़ रुपए पड़े रहे,
-सालभर में खर्च महज ८७.८५ लाख रुपए
-विपक्ष ने पूछा, राहत के लिए नहीं, तो आखिर किस दिन खुलेगा यह खजाना?

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

कोरोना महामारी के दौरान आपात स्थितियों में जनता की मदद के लिए बनाए गए पीएम केयर्स फंड को लेकर एक बार फिर पारदर्शिता और उसके इस्तेमाल पर तीखे सवाल खड़े हो गए हैं। वित्त वर्ष २०२४-२५ के ताजा ऑडिट आंकड़ों के मुताबिक ३१ मार्च २०२५ तक फंड का बैलेंस बढ़कर करीब ८,४५२.०६ करोड़ रुपए हो गया, लेकिन पूरे वित्त वर्ष में इससे कुल भुगतान सिर्फ ८७.८५ लाख रुपए किया गया। यानी उपलब्ध रकम के मुकाबले खर्च करीब ०.०१ प्रतिशत ही रहा। इस पर अब कांग्रेस ने मोदी सरकार से सवाल पूछा है कि राहत के लिए नहीं, तो आखिर किस दिन खुलेगा यह खजाना?
एफडी में पड़ा चंदा, ब्याज से आया करोड़ों का फायदा
कुल रकम में से करीब ७,८४६.६५ करोड़ यानी लगभग ९३ प्रतिशत पैसा फिक्स्ड डिपॉजिट में पड़ा था, जबकि करीब ६०५ करोड़ रुपए बचत खातों में था। इन एफडी से फंड को वर्षभर में करीब ४६९.३७ करोड़ रुपए ब्याज मिला और बचत खाते से करीब ५.७७ करोड़ रुपए की ब्याज आय हुई। दूसरी ओर इसी अवधि में घरेलू चंदा करीब ४७९ करोड़ रुपए रहा।
फंड भरा रहा, जरूरतमंदों तक पैसा कितना पहुंचा?
पीएम केयर्स फंड को लेकर सामने आए आंकडों ने मोदी सरकार की जवाबदेही पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। हजारों करोड़ रुपए उपलब्ध होने के बावजूद बेहद मामूली रकम खर्च होने और ३२४ करोड़ रुपए से अधिक वापस आने से पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। वर्ष २०२४-२५ में हुए ८७.८५ लाख के भुगतान में से लगभग पूरा, ८७.८४ लाख, पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन योजना पर खर्च बताया गया है। शेष सिर्फ ४५१ बैंक और एसएमएस शुल्क के रूप में दर्ज है। इसके मुकाबले पिछले वित्त वर्ष में कुल भुगतान करीब १५.६० करोड़ था।कांग्रेस ने पूछा है, आपदा में जनता परेशान रही तो करोड़ों का फंड आखिर पड़ा क्यों रहा? इन आंकड़ों के सामने आने के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हमला बोल दिया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सवाल उठाया कि जब देश के अलग-अलग हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं से लोग प्रभावित हो रहे हैं और पुनर्वास तथा राहत की जरूरत है, तब हजारों करोड़ रुपए का फंड लगभग निष्क्रिय क्यों पड़ा है, उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ८,४५२ करोड़ उपलब्ध होने के बावजूद सिर्फ ०.०१ प्रतिशत इस्तेमाल किया गया पीएम केयर्स हार्डली। ऑडिट में एक और दिलचस्प एंट्री सामने आई है। विभिन्न कार्यान्वयन एजेंसियों से करीब ३२४.६६ करोड़ रुपए वापस पीएम केयर्स में आए, लेकिन उपलब्ध संक्षिप्त वित्तीय विवरण में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि रकम किन एजेंसियों ने लौटाई, किस परियोजना के लिए पहले दी गई थी और वापसी का कारण क्या रहा।

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