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बुजुर्गों को सताया तो घर से जाना पड़ेगा!..सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों की बेदखली पर लगाई मुहर

सामना संवाददाता / मुंबई

सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक अपनी सुरक्षा, भरण-पोषण तथा सम्मान के लिए अपने बच्चों को संपत्ति या घर से बाहर निकाल सकते हैं। न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस पैâसले को रद्द कर दिया, जिसमें बेटे और बहू को घर से बेदखल करने के ट्रिब्यूनल के आदेश को खारिज कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए ट्रिब्यूनल को बच्चों को बेदखल करने का आदेश देने का पूरा अधिकार है, क्योंकि एक सभ्य समाज की पहचान इसी बात से होती है कि वह अपने बुजुर्गों को कितना सम्मान और सुरक्षा देता है।
यह मामला लखनऊ के विकासनगर निवासी रविकांत गुप्ता की याचिका से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने अपनी ही गाढ़ी कमाई से खरीदे गए घर से बेटे को बाहर निकालने के लिए जून २०२२ में जिलाधिकारी से गुहार लगाई थी। बाद में एसडीएम और जिलाधिकारी ने बेटे तथा बहू को घर खाली करने का आदेश दिया था। हालांकि, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस आदेश को रद्द कर दिया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट द्वारा ट्रिब्यूनल के पैâसले में हस्तक्षेप करना गलत था और २००७ के कानून के तहत वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल व सुरक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर ट्रिब्यूनल बेदखली का आदेश दे सकता है।

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