अनिल मिश्र / रांची
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु एवं गृह मंत्री अमित शाह को पत्र प्रेषित कर जैन धर्म के पावन पर्व क्षमावाणी को राष्ट्रीय क्षमा दिवस के रूप में घोषित करने की मांग की। इस संबंध में रामगढ़ दिगम्बर जैन समाज के सचिव योगेश सेठी ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि आप ने क्षमावाणी के महत्व को स्वीकार करते हुए अपने संबोधन में मिच्छामि दुक्कड़म कहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हमारे जैन धर्म का मुख्य सिद्धांत ही दया, ममता, करुणा और क्षमा है। हम जैन धर्मावलम्बी क्षमावाणी के पावन अवसर पर अपने से छोटे एवं बड़े सभी से विगत वर्ष में जाने-अनजाने में अपने द्वारा की गई भूलों के लिए क्षमा मांगते हैं। क्षमा मांगने से और क्षमा करने से मांगने वाले और देने वाले दोनों की मर्यादा की बढ़ोतरी होती है। इसके अलावा सेठी ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि जिस प्रकार आपकी दूरदर्शी पहल से योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली, उसी प्रकार क्षमावाणी को राष्ट्रीय क्षमा दिवस के रूप में मान्यता देने के विषय में विचार किया जाना चाहिए। इसके अलावा समस्त जैन समाज की तरफ से अनुरोध करते हुए कहा कि इस विषय पर शीघ्रता से विचार कर इसे इसी वर्ष से राष्ट्रीय स्तर पर मनाने की शुरुआत की जाए। जैन समाज के मीडिया प्रभारी श्रवण जैन ने इस बीच उपरोक्त जानकारी पत्रकारों को दी।
