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मां को थी बेटी की आवाज सुनने की आस…अब कॉक्लियर इम्प्लांट से खुलेगी सुनने की राह

संदीप पांडेय / मुंबई

जिस बच्ची की दुनिया अब तक आवाजों से अनजान थी, उसके लिए अब नई उम्मीद जगी है। महाराष्ट्र के रायगड जिले के कोलमंडला की रहने वाली ३ वर्षीय अनाबिया इरशाद पंगारकर को सुनने में दिक्कत थी। परिवार को इसका पता तब चला, जब अनाबिया करीब एक साल की हुई और किसी के बुलाने पर भी वह प्रतिक्रिया नहीं देती थी। बेटी की इस स्थिति ने उसकी मां नबीला पंगारकर की चिंता बढ़ा दी।
नबीला ने बेटी की जांच मुंबई में कराई। बीईआरए (बेरा) टेस्ट की रिपोर्ट में सामने आया कि अनाबिया सुन नहीं पा रही है। इसके बाद उन्हें कॉक्लियर इम्प्लांट कराने की सलाह दी गई। हालांकि, नबीला के मन में कई सवाल थे। उन्हें डर था कि इतनी छोटी बच्ची की सर्जरी से कहीं कोई दूसरी परेशानी न हो जाए। साथ ही उन्हें यह भी जानकारी नहीं थी कि कॉक्लियर इम्प्लांट क्या होता है।
इसी दौरान उन्हें मुंबई के कुर्ला-पश्चिम स्थित क्रिटिकेयर एशिया मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के ईएनटी विभाग एवं कॉक्लियर इम्प्लांट प्रोग्राम के प्रमुख डॉ. संजय हेलाले का संपर्क मिला। डॉक्टर से बातचीत के बाद नबीला को कॉक्लियर इम्प्लांट प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी मिली और उनका डर भी कम हुआ। इसके बाद उन्होंने अपनी बेटी की सर्जरी कराने का फैसला किया।
नि:शुल्क हुई कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी
श्रव्या कॉक्लियर इम्प्लांट प्रोग्राम और एचसीपी ईएनटी चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से अनाबिया की नि:शुल्क कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी कराई गई। परिवार के अनुसार, सर्जरी सफल रही। अब नबीला को उस पल का इंतजार है, जब उनकी बेटी पहली बार आवाज सुन सकेगी।
नबीला ने इस पहल के लिए डॉ. संजय हेलाले और उनकी पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जिस परिवार का बच्चा भी सुनने में इसी तरह की परेशानी से गुजर रहा है, उसे घबराने के बजाय समय रहते विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच और सलाह लेनी चाहिए तथा योग्य चिकित्सकीय सलाह के अनुसार कॉक्लियर इम्प्लांट जैसे उपचार के विकल्प पर विचार करना चाहिए।

 

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