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कृत्रिम तालाब के नाम पर मनपा का ‘कंक्रीट’ फॉर्मूला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रडार पर

-एमपीसीबी ने मीरा-भायंदर मनपा से मांगा स्पष्टीकरण

सुरेश गोलानी / मुंबई

दैनिक समाचार पत्र ‘दोपहर का सामना’ में प्रमुखता से प्रकाशित खबर ‘तालाब एक, टुकड़े दो! कृत्रिम तालाब के नाम पर मीरा-भायंदर मनपा का ‘कंक्रीट’ फॉर्मूला’ का बड़ा असर (इम्पैक्ट) देखने को मिला है। खबर सामने आने के बाद महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) के ठाणे प्रादेशिक कार्यालय ने मामले की गंभीरता को संज्ञान में लेते हुए मीरा-भायंदर महानगरपालिका आयुक्त के नाम एक आधिकारिक पत्र जारी कर इस मामले में स्पष्टीकरण और विसर्जित की गई मूर्तियों की तत्काल रिपोर्ट मांगी है। यह पूरा मामला गणेश मूर्ति विसर्जन के लिए पर्यावरण नियमों को ताक पर रखने से जुड़ा है। मनपा ने नए और स्वतंत्र कृत्रिम तालाब बनाने के बजाय शहर के प्राकृतिक तालाबों के बीचों-बीच पक्की कंक्रीट की दीवार खड़ी कर दी। मनपा का तर्क है कि दीवार के एक हिस्से को ‘कृत्रिम’ मानकर वहां प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों वाली मूर्तियों का विसर्जन किया जाएगा, जिससे प्रदूषण नहीं फैलेगा।
हालांकि, ‘दोपहर का सामना’ की रिपोर्ट और पर्यावरण प्रेमी धीरज परब द्वारा की गई शिकायत ने इस ‘जुगाड़’ की पोल खोलते हुए उजागर कर दिया कि एक ही तालाब में दीवार खड़ी करने से दूषित पानी का रिसाव नहीं रुकेगा और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह नष्ट हो जाएगा। प्रादेशिक अधिकारी किरण हसबनिस द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में मनपा को एक प्रकार से कड़ी चेतावनी दी गई है कि कृत्रिम तालाबों की व्यवस्था या निर्माण करते समय मैंग्रोव्ज क्षेत्र और कोस्टल रेगुलेशन जोन के नियमों का किसी भी कीमत पर उल्लंघन नहीं होना चाहिए। इसके अलावा बोर्ड ने महाराष्ट्र शासन के १ सितंबर २०२६ के पर्यावरण परिपत्रक का सख्ती से पालन करने का निर्देश देते हुए मनपा से अब तक की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट तुरंत मांगी है। चौतरफा घिरे मनपा अधिकारियों के अनुसार, एमपीसीबी के पत्र का प्रशासन द्वारा जल्द ही आधिकारिक तौर पर लिखित जवाब सौंपा जाएगा।

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