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सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटील पर आरबीआई का शिकंजा!

 -१० साल की कार्यकाल सीमा ने छीनी जिला बैंक की कुर्सी; सात निदेशकों के बाद पाटील पर भी कार्रवाई

सुनील ओसवाल / मुंबई

महाराष्ट्र की राजनीति और सहकार क्षेत्र में उस समय हलचल मच गई, जब भारतीय रिजर्व बैंक ने राज्य के सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटील को लातूर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के निदेशक पद से हटाने का आदेश दिया। बैंक के निदेशक पद पर निर्धारित १० साल की अधिकतम कार्यकाल सीमा से जुड़े नियम के उल्लंघन के मामले में यह कार्रवाई की गई है। सहकार विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे मंत्री के खिलाफ आरबीआई की कार्रवाई ने सहकार क्षेत्र में नियमों के पालन और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
लातूर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के सदस्य और अधिकृत मतदार प्रतिनिधि सतीश शेषराव जाधव ने २५ मई २०२६ को आरबीआई के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बैंक के १९ सदस्यीय संचालक मंडल के आठ निदेशकों के निर्धारित १० साल की अवधि से अधिक समय तक पद पर बने रहने का मुद्दा उठाया गया था। इनमें सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटील भी शामिल थे। शिकायत पर तत्काल कार्रवाई नहीं होने के बाद जाधव ने बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ का रुख किया। ३ अगस्त २०२६ को अदालत ने आरबीआई को शिकायत पर छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया। इसके बाद आरबीआई ने संबंधित निदेशकों से जवाब मांगा।
मंत्री बोले-फैसला गलत, हाई कोर्ट में देंगे चुनौती
आरबीआई की कार्रवाई पर बाबासाहेब पाटील ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि २०२१ में निदेशकों के कार्यकाल को लेकर बनाए गए प्रावधान उनके मामले पर लागू होते हैं और उन्हें इस आधार पर पद से हटाना उचित नहीं है। उन्होंने आरबीआई के फैसले को चुनौती देने के लिए हाई कोर्ट जाने की बात कही है।
सात ने छोड़ी कुर्सी, पाटील पर आरबीआई का आदेश
आरबीआई की कार्रवाई से पहले सात निदेशकों ने १० सितंबर को अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे बैंक की ओर से आरबीआई को भेजे गए। बाबासाहेब पाटील ने इस्तीफा नहीं दिया। इसके बाद १८ सितंबर को आरबीआई ने बैंक को ऐसे निदेशक को पद से हटाने का निर्देश दिया, जो बैंकिंग विनियमन कानून की संबंधित धारा के तहत पद पर बने रहने के लिए अयोग्य है।

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