हिमांशु राज
उत्तर प्रदेश की चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल का इस्तीफा महज एक प्रशासनिक घटना नहीं, बल्कि २०२७ की विधानसभा चुनावी राजनीति का पहला महत्वपूर्ण मोहरा साबित हो रहा है। उत्तर प्रदेश में २०२७ की विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। भाजपा सरकार ने चुनाव से पहले ७०,००० नई नौकरियों की घोषणा की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में दिव्या मित्तल जैसे प्रभावशाली प्रशासनिक अधिकारी का इस्तीफा राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
दिव्या मित्तल, जो आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बंगलुरु से शिक्षित हैं, ने १३ साल की सेवा के बाद ३० अगस्त २०२६ को इस्तीफा दे दिया। वे राजस्व विभाग में विशेष सचिव थीं, लेकिन इससे पहले मिर्जापुर, संत कबीर नगर और देवरिया में जिलाधिकारी के रूप में कार्य किया है। भाजपा का दावा है कि दिव्या उत्तर प्रदेश से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ सकती हैं। वहीं दिव्या मित्तल के इस्तीफे पर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ईमानदार अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है और योगी सरकार भ्रष्टाचार, टेंडर और तबादलों से जुड़े दबाव बना रही है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इस मामले में राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है। हालांकि, जब दिव्या मित्तल को कांग्रेस का टिकट देने की संभावना पर पूछा गया, तो अजय राय ने स्पष्ट नहीं किया। सूत्रों के मुताबिक, दिव्या मित्तल मिर्जापुर या देवरिया से चुनाव लड़ सकती हैं, जहां उन्होंने जिलाधिकारी के रूप में कार्य किया है। मिर्जापुर में उनके और सांसद अनुप्रिया पटेल के बीच मतभेद की भी चर्चा रही है। २०२७ चुनाव में दिव्या मित्तल का प्रवेश कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण मोहरा साबित हो सकता है। उनकी आईआईटी-आईआईएम की पृष्ठभूमि उन्हें मध्यम वर्ग और युवा मतदाताओं के बीच आकर्षक उम्मीदवार बना सकता है।
दिव्या मित्तल के राजनीति में आने से विपक्ष को स्पष्ट राजनीतिक लाभ होने की संभावना है। एक शिक्षित, युवा और प्रशासनिक अनुभव रखने वाली महिला उम्मीदवार के रूप में वे भाजपा की पारंपरिक मतदाता आधार को चुनौती दे सकती हैं। उनकी छवि एक ईमानदार अधिकारी की रही है, जो भ्रष्टाचार और प्रशासनिक दबाव के मुद्दों पर विपक्ष को मजबूत हथियार दे सकती है। विशेषकर मिर्जापुर और देवरिया जैसे क्षेत्रों में, जहां उनका कार्यकाल रहा है, वे स्थानीय मुद्दों और विकास कार्यों के आधार पर मजबूत पकड़ बना सकती हैं।
दिव्या मित्तल ने अभी तक भविष्य की योजनाओं पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। एक न्यूज चैनल से बातचीत में उन्होंने राजनीति में आने के सवाल पर फिलहाल साफ इनकार किया है, लेकिन कहा कि ‘समय आने पर बोलूंगी।’ उनका इस्तीफा अभी केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुमोदन के लिए लंबित है। दिव्या मित्तल का इस्तीफा निजी और पारिवारिक कारणों से बताया जा रहा है, लेकिन २०२७ विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में यह राजनीतिक दलों के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। भाजपा इसे कांग्रेस की साजिश के रूप में पेश कर रही है, जबकि विपक्षी दल इसे प्रशासनिक दबाव का उदाहरण बता रहे हैं। आने वाले महीनों में दिव्या मित्तल का अगला कदम २०२७ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।
