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देशभर की गड्ढेदार सड़कों के बाद ‘गडकरी’ को मुंबई-गोवा महामार्ग की सुध! …१५ साल से अधूरा महामार्ग, अब गडकरी बोले-शर्म आती है, उद्घाटन में नहीं जाऊंगा

ठेकेदारों को काली सूची में डालने की चेतावनी; सवाल-इतने साल जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हुई?
सामना संवाददाता / मुंबई
देशभर में खराब सड़कों, गड्ढों और अधूरी राजमार्ग परियोजनाओं को लेकर जनता की नाराजगी के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को आखिरकार मुंबई-गोवा महामार्ग की लंबी दुर्दशा पर खुलकर बोलना पड़ा है। उन्होंने स्वीकार किया है कि इस परियोजना में हुई बेहिसाब देरी पर उन्हें ‘शर्म’ आती है और वह इसके उद्घाटन समारोह में शामिल भी नहीं होंगे।

सितंबर २०२६ तक मात्र ९४ प्रतिशत काम ही पूरा
२०११ में शुरू हुआ था मुंबई-गोवा महामार्ग के चौड़ीकरण का काम

मुंबई-गोवा महामार्ग के चौड़ीकरण का काम २०११ में शुरू हुआ था और इसे वर्षों पहले पूरा हो जाना चाहिए था। लेकिन सितंबर २०२६ तक भी केवल लगभग ९३ से ९४ प्रतिशत काम ही पूरा हुआ है। कई हिस्सों में पुल, बायपास और अन्य निर्माण कार्य अब भी बाकी हैं। गडकरी ने अब खराब काम करने वाले ठेकेदारों को काली सूची में डालने और लापरवाह अधिकारियों को निलंबित करने की चेतावनी दी है। उन्होंने अक्टूबर में खुद मुंबई से गोवा तक सड़क मार्ग से यात्रा कर निर्माण की गुणवत्ता और यात्रियों को हो रही परेशानी का जायजा लेने की बात भी कही है। लेकिन बड़ा सवाल यही है, जब यह परियोजना साल-दर-साल लटकती रही, यात्रियों ने गड्ढे, जाम, डायवर्जन और अधूरे निर्माण का सामना किया, तब जिम्मेदार ठेकेदारों और अधिकारियों पर इतनी सख्ती क्यों नहीं हुई?
अब काम लगभग अंतिम चरण में पहुंचने के बाद जताई जा रही ‘शर्म’ पर विपक्ष और आलोचक कटाक्ष कर सकते हैं, इतने वर्षों बाद आई यह सुध जवाबदेही है या सिर्फ देर से बहाए गए ‘मगरमच्छ के आंसू’?

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