पोषण आहार बना ‘शोषण आहार’
कहीं अवधि समाप्त मसाले तो कहीं
शौचालय के पास मिला अनाज
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर सरकार के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। कई नामी स्कूल में विद्यार्थियों को दिए जाने वाले पोषण आहार में अवधि समाप्त हो चुके मसाले इस्तेमाल किए जाने तथा अनाज का भंडारण शौचालय के ठीक बगल में किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। कुडाल के एक स्कूल में यह मामला सामने आया है। ऐसे में विपक्ष ने सरकार का घेराव करते हुए कहा कि भोजन की गुणवत्ता और अनाज के सुरक्षित भंडारण में इस तरह की लापरवाही बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सामने आए मामले में पोषण आहार के लिए रखे गए मसालों की अवधि समाप्त हो चुकी थी। सबसे चौंकाने वाली तस्वीर अनाज के भंडारण को लेकर सामने आई। बच्चों के भोजन के लिए इस्तेमाल होने वाला चावल कथित तौर पर शौचालय के बगल में अस्वच्छ वातावरण में रखा गया था। सरकार स्कूलों में बच्चों को पोषण देने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत में यदि अवधि समाप्त सामग्री बच्चों की थाली तक पहुंच रही है तो यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि पूरी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।
एक स्कूल नहीं, पूरी व्यवस्था
सवालों के घेरे में
सिंधदुर्ग के कुडाल का मामला सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि राज्य के दूसरे स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले पोषण आहार की जांच आखिर कितनी गंभीरता से होती है। यदि एक नामी स्कूल में अवधि समाप्त मसाले और शौचालय के पास अनाज रखने जैसी लापरवाही सामने आ सकती है, तो ग्रामीण और दूरदराज के स्कूलों की स्थिति की नियमित जांच कौन करेगा?
