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यूपीआई ट्रांजेक्शन पर टैक्स को लेकर विपक्ष का हमला…जेब खाली, सरकार की वसूली जारी!

-सरकार के खिलाफ भड़का जनाक्रोश, आंदोलन की तैयारी

सामना संवाददाता / मुंबई

कभी देश को नकदी से मुक्त करने का अभियान चलाया गया, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया गया और यूपीआई को आम जनता तथा छोटे व्यापारियों के लिए आसान और मुफ्त व्यवस्था के रूप में पेश किया गया। अब २,००० रुपए से अधिक के चुनिंदा व्यापारी-भुगतान वाले यूपीआई लेनदेन पर ०.४ प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने के फैसले ने मोबाइल से पेमेंट करने वाले और आम व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। यह व्यवस्था १५ अक्टूबर २०२६ से लागू होगी।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक रोहित पवार ने इस पैâसले को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहले नोटबंदी के जरिए लोगों को कतारों में खड़ा किया गया, फिर डिजिटल इंडिया और मुफ्त यूपीआई के नाम पर देश को नकदी रहित व्यवस्था की ओर धकेला गया और अब उसी डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर शुल्क लगाने की तैयारी है। रोहित पवार ने पूछा कि जब सरकार ने व्यापारियों को डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, तो अब उसी व्यवस्था की लागत व्यापारियों पर डालने की जरूरत क्यों पड़ी? उनका आरोप है कि शुल्क व्यापारी से लिया जाएगा, लेकिन उसका अप्रत्यक्ष बोझ अंततः ग्राहक तक पहुंचने की आशंका है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस गलत नीति के खिलाफ जनता आंदोलन करेगी।
पहले डिजिटल इंडिया…अब टैक्स दे भैया
सरकार की इस गजब नीति को लेकर विपक्ष अभी से आक्रामक हो गया है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि पहले डिजिटल इंडिया के नाम पर लोगों को आदत लगाई अब लोगों से `टैक्स दो भैया’ कह कर उन्हें अड़चन में डाल दिया।
सरकार का दावा, ग्राहक से नहीं लिया जाएगा शुल्क
उधर केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि एमडीआर कोई सरकारी कर नहीं है और इसे ग्राहकों से वसूलने की अनुमति नहीं होगी। २,००० रुपए तक के व्यापारी भुगतान तथा व्यक्ति-से-व्यक्ति सभी यूपीआई लेनदेन मुफ्त रहेंगे। सरकार के अनुसार करीब ९६ प्रतिशत व्यापारी लेनदेन इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे। इसके बावजूद विपक्ष और व्यापारिक संगठनों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं।

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