सामना संवाददाता / कोलकाता
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के चुनावी प्रचार में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को किए गए भुगतानों का मामला सामने आने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है।
चुनाव आयोग को भाजपा की ओर से सौंपे गए चुनावी खर्च के आंकड़ों में कई सोशल मीडिया क्रिएटर्स को किए गए भुगतान का उल्लेख है। इनमें अभिनेता एवं इन्फ्लुएंसर सायक चक्रवर्ती को २.५ लाख रुपए और ‘नॉनसेंस’ के नाम से चर्चित शमीक अधिकारी को १३ लाख रुपए दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
ऑलीपब विवाद से फिर जुड़ा सायक का नाम
भुगतान की जानकारी सामने आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा सायक चक्रवर्ती की हो रही है। जनवरी २०२६ में कोलकाता के पार्क स्ट्रीट स्थित प्रसिद्ध ‘ऑलीपब’ रेस्तरां में सायक ने दावा किया था कि मटन स्टेक मंगाने के बावजूद उन्हें बीफ परोसा गया। इसके बाद मामला विवाद में बदल गया और धार्मिक तथा राजनीतिक बहस तेज हो गई। इस घटना के सिलसिले में एक वेटर की गिरफ्तारी भी हुई थी।
अब चुनाव आयोग के आंकड़ों में सायक को २.५ लाख रुपए का भुगतान सामने आने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। पार्टी ने आरोप लगाया है कि चुनाव से पहले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के जरिए राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने की कोशिश की गई।
‘बटन’ बनाने वाले शमीक को १३ लाख
भाजपा के चुनावी खर्च के आंकड़ों में शमीक अधिकारी का नाम भी सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक उन्हें १३ लाख रुपए का भुगतान किया गया। शमीक ने चुनाव से पहले ‘बटन’ नाम की राजनीतिक शॉर्ट फिल्म बनाई थी, जिसमें बंगाल की राजनीतिक स्थिति और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे उठाए गए थे। यूट्यूबर सुकांत कुंडू का नाम भी भुगतान को लेकर चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके माता-पिता के खातों में क्रमशः ३ लाख और ४.५ लाख रुपए का भुगतान दर्ज होने का दावा किया गया है।
यानी कुल ७.५ लाख रुपए। सुकांत ने भुगतान स्वीकार किए जाने की बात कही है, लेकिन ऑलीपब विवाद से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया है। भाजपा की ओर से कहा गया है कि चुनाव प्रचार के लिए विज्ञापन एजेंसियों, कलाकारों या कंटेंट क्रिएटर्स की सेवाएं लेना सामान्य और वैध प्रक्रिया है। पार्टी का कहना है कि भुगतान बैंकिंग माध्यम से पारदर्शी तरीके से किया गया और चुनाव आयोग के नियमों का पालन किया गया।
सायक ने भी किया भुगतान का बचाव
सायक चक्रवर्ती ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्हें मिले २.५ लाख रुपए चुनाव प्रचार के दौरान बनाए गए दो अलग-अलग वीडियो के लिए थे। उनका कहना है कि ३० जनवरी का ऑलीपब विवाद और मार्च-मई के दौरान हुआ भुगतान अलग-अलग घटनाएं हैं और दोनों के बीच कोई संबंध नहीं है।
टीएमसी ने साधा निशाना
तृणमूल कांग्रेस ने इन भुगतानों को लेकर भाजपा पर हमला बोला है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि सोशल मीडिया पर निष्पक्ष दिखने वाले कुछ क्रिएटर्स वास्तव में राजनीतिक प्रचार के लिए भुगतान ले रहे थे। हालांकि, किसी भुगतान का होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि संबंधित व्यक्ति ने कोई फर्जी या भ्रामक नैरेटिव जानबूझकर तैयार किया था। इस संबंध में सामने आए राजनीतिक आरोपों और संबंधित क्रिएटर्स के जवाब अलग-अलग हैं।
