-ब्रह्मा चेलानी की चेतावनी अमेरिका-चीन का अनौपचारिक ‘जी-२’ बना तो ताइवान और जापान सबसे ज्यादा दबाव में; भारत के लिए भी रणनीतिक संकेत
अमेरिका और चीन के बीच बनते कथित अनौपचारिक ‘जी-२’ समीकरण को लेकर भू-राजनीतिक विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि वाशिंगटन यदि बीजिंग के साथ बड़े द्विपक्षीय समझौतों को प्राथमिकता देता है, तो सबसे अधिक असुरक्षा उसके अपने एशियाई सहयोगियों में पैदा होगी। चेलानी पहले भी लिख चुके हैं कि ऐसा ‘जी-२’ ढांचा हिंद-प्रशांत के बहुध्रुवीय संतुलन को कमजोर कर सकता है।
सबसे बड़ी चिंता ताइवान को लेकर है। क्षेत्र में आशंका है कि व्यापार या दूसरे आर्थिक लाभों के बदले अमेरिका ताइवान से जुड़े मुद्दों पर चीन को रियायत दे सकता है। रॉयटर्स के मुताबिक, जापान और अन्य अमेरिकी सहयोगियों ने भी ऐसी संभावित नरमी को लेकर वाशिंगटन से भरोसा मांगा है।
जापान की चिंता भी कम नहीं है। यदि अमेरिका चीन के साथ सीधे शक्ति-संतुलन की व्यवस्था की ओर बढ़ता है, तो दशकों पुराना अमेरिकी-जापानी सुरक्षा ढांचा दबाव में आ सकता है। चेलानी के अनुसार, भारत-जापान सहयोग और स्वतंत्र हिंद-प्रशांत रणनीति ऐसे बदलते समीकरण में और महत्वपूर्ण हो सकती है। क्या ट्रंप की चीन नीति सहयोगियों की सुरक्षा की कीमत पर ‘दो महाशक्तियों’ की सौदेबाजी का रास्ता खोल रही है?
