मुख्यपृष्ठनए समाचारमंत्रियों के दफ्तर खाली सरकार में खलबली!

मंत्रियों के दफ्तर खाली सरकार में खलबली!

-५५० कर्मचारी मूल विभाग में लौटे, कामकाज प्रभावित
-नए स्वतंत्र पद बनाने की तैयारी, कुछ मंत्रियों में नाराजगी की चर्चा

सुनील ओसवाल / मुंबई
महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार में मंत्रियों के कार्यालयों से अधिकारी-कर्मचारियों के मूल विभाग में लौटने के बाद कुछ मंत्रियों में नाराजगी होने की चर्चा है। सामान्य प्रशासन विभाग की अनुमति के बिना मंत्रियों और राज्यमंत्रियों के कार्यालयों में तैनात किए गए अधिकारी-कर्मचारियों को वापस भेजे जाने के मुख्य सचिव के निर्देश के बाद कई कर्मचारी अपने मूल विभाग में लौट गए हैं। इससे मंत्रियों के कार्यालयों में कामकाज प्रभावित होने की जानकारी सामने आ रही है।
मंत्रियों के कार्यालयों में कर्मचारियों की संख्या कम होने से नागरिकों की शिकायतों, निवेदनों और विभिन्न मामलों के फॉलोअप में दिक्कत आने की बात कही जा रही है। जिलास्तर पर भी मंत्रियों के साथ काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या घटने से स्थानीय समस्याओं और प्रशासनिक मामलों के समन्वय पर असर पड़ रहा है। मंत्रियों के कार्यालयों में विभिन्न विभागों से अधिकारी-कर्मचारियों को ‘उसनवारी’ अथवा प्रतिनियुक्ति के आधार पर तैनात किया गया था। इन नियुक्तियों के लिए सामान्य प्रशासन विभाग की आवश्यक अनुमति नहीं लिए जाने की बात सामने आने के बाद मुख्य सचिव ने संबंधित कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में लौटने के निर्देश दिए। निर्देश के बाद बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी मूल विभाग में वापस चले गए। इससे मंत्रियों के कार्यालयों में उपलब्ध मनुष्यबल अचानक कम हो गया है।

स्वतंत्र पद सृजन की तैयारी
अब मंत्रियों के कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए स्वतंत्र पद सृजित करने की तैयारी शुरू होने की जानकारी है। सूत्रों के अनुसार, संबंधित मंत्रियों की ओर से अधिकारी-कर्मचारियों की नियुक्ति के प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग को भेजे गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग मुख्यमंत्री के अधीन होने के कारण इन प्रस्तावों पर मुख्यमंत्री की मंजूरी महत्वपूर्ण होगी। मंजूरी मिलने के बाद मंत्रियों के कार्यालयों में संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की नियुक्ति को औपचारिक आधार मिल सकेगा। कर्मचारियों की कमी के बाद कुछ मंत्रियों की ओर से विभाग प्रमुखों से अधिकारी-कर्मचारी उपलब्ध कराने की मांग किए जाने की जानकारी है। मंत्रियों की मांग होने के कारण वरिष्ठ अधिकारियों के लिए इनकार करना भी मुश्किल स्थिति पैदा करता है। कुछ कर्मचारियों को मौखिक निर्देशों के आधार पर मंत्रियों के कार्यालयों में भेजे जाने की बात भी सामने आई है।

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