-भाजपा सरकार और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फूटा युवाओं का आक्रोश
-महाराष्ट्र की राजनीतिक टूट पर प्रदर्शनकारियों का हमला
-एजेंसियों और सत्ता के कथित दुरुपयोग पर उठे सवाल
-हिंदू-मुस्लिम राजनीति छोड़ने की अपील
-‘हमारे वोट को हाथ लगाया तो देशभर में आंदोलन’
संदीप पांडेय / मुंबई
‘‘यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हमारे वोट की कोई कीमत नहीं लगती, तो वोट चोरी की जरूरत क्यों पड़ रही है?’’ शिवाजी पार्क में प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने शुक्रवार को इस सवाल के साथ केंद्र सरकार, भाजपा और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर जोरदार हमला बोला।
प्रदर्शनकारियों ने महाराष्ट्र में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में हुई टूट, सांसदों-विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त और केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई को सत्ता हासिल करने की राजनीति बताया। वक्ताओं ने कहा कि २०१९ के बाद महाराष्ट्र ने जनादेश को बार-बार टूटते और सत्ता के समीकरणों को बदलते देखा है। युवाओं ने २०२४ के लोकसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा ने ‘४०० पार’ का नारा दिया था, लेकिन जनता ने उसे २४० सीटों पर रोक दिया। अब मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों और एसआईआर के जरिए जनता के इसी फैसले को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। प्रदर्शनकारियों ने देश को हिंदू-मुस्लिम राजनीति से बाहर निकालने की अपील करते हुए कहा कि रोजगार, शिक्षा, महंगाई और मताधिकार के सवालों से ध्यान नहीं भटकने दिया जाएगा। सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई गई। युवाओं ने कहा, ‘‘वोट पर डाका पड़ा तो दिल्ली की गद्दी तक आंदोलन की गूंज पहुंचेगी।’’
१३ करोड़ नामों का हिसाब दो
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि देश के लगभग ९७ करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से १३ करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूचियों से बाहर कर दिए गए हैं। वक्ताओं ने पूछा कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने का जिम्मेदार कौन है और चुनाव आयोग इसका पूरा हिसाब सार्वजनिक क्यों नहीं करता? युवाओं का कहना था कि किसी मतदाता का नाम बिना पारदर्शी प्रक्रिया के हटाना उसके लोकतांत्रिक अधिकार को छीनने जैसा है।
बच्ची की हुंकार ने खींचा सबका ध्यान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रही नारेबाजी के बीच एक छोटी बच्ची ने भी पूरी ताकत से अपनी आवाज बुलंद की। बच्ची का जोशीला अंदाज देखकर आसपास मौजूद प्रदर्शनकारी भी उसके साथ नारे लगाने लगे। हाथों में तख्तियां लिए युवाओं और नागरिकों के बीच बच्ची की आवाज आंदोलन का आकर्षण बन गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह लड़ाई केवल आज के मतदाताओं की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लोकतांत्रिक अधिकारों की भी है। बच्ची की नारेबाजी का वीडियो और तस्वीरें प्रदर्शन के दौरान तेजी से लोगों का ध्यान खींचती रहीं। उसने दिखा दिया कि वोट और लोकतंत्र का सवाल हर पीढ़ी से जुड़ा है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक नहीं रुकेंगे
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने आंदोलन के मंच से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया रोकी जाए, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के पूरे मामले की स्वतंत्र जांच हो और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए। दीपके ने साफ किया कि आंदोलन केवल एक दिन का प्रदर्शन बनकर खत्म नहीं होगा। मुंबई के बाद गोवा, कोलकाता, बेंगलुरु और देश के अन्य शहरों में भी प्रदर्शन किए जाएंगे। इसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा आंदोलन होगा।
