-ई राज
बाहर निकला अदृश्य
खौफनाक कातिल
साइबेरिया की बर्फीली हवाओं के बीच एक गुमनाम प्रयोगशाला की दीवारें अचानक सायरन की चीखों से गूंज उठीं। टेस्ट ट्यूब का एक कांच टूटा और कुछ ही पलों में फर्श पर फैल गया एक अदृश्य खौफनाक कातिल, एक ऐसा घातक वायरस, जो इंसानियत के वजूद को चंद हफ्तों में मिटाने का दम रखता है। यह सिर्फ एक खौफनाक कल्पना नहीं, बल्कि वह खामोश सच है जो दुनिया को एक और वैश्विक तबाही की दहलीज पर लाकर खड़ा कर सकता है। क्या साइबेरिया की लैब्स में हुआ यह हादसा ‘वुहान पार्ट-२’ की शुरुआत है?
रूस के साइबेरिया क्षेत्र में स्थित स्टेट रिसर्च सेंटर ऑफ बायोटेक्नोलॉजी एंड वायरोलॉजी (जिसे ‘वेक्टर’ के नाम से भी जाना जाता है) दुनिया की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली ‘बायो-सेफ्टी लेवल ४’ लैब्स में से एक है। यहां चेचक, इबोला, एंथ्रेक्स और प्लेग जैसे दुनिया के सबसे जानलेवा और संक्रामक वायरसों पर शोध किया जाता है। जब ऐसी किसी जगह पर गैस विस्फोट या इंसानी भूल के कारण कोई दुर्घटना होती है, तो पूरी दुनिया के सांसें थम जाना स्वाभाविक है।
इस घटना ने २०१९ के वुहान हादसे की कड़वी यादों को फिर से ताजा कर दिया है। कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को यह सिखाया कि प्रयोगशाला से लीक हुआ या फैला एक सूक्ष्म जीव कैसे करोड़ों जिंदगियां लील सकता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को तबाह कर सकता है। साइबेरिया की लैब में हुए इस हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है, क्या यह कोई नया प्लेग या वैश्विक महामारी की शुरुआत है?
कितना बड़ा है यह खतरा?
घातक पैथोजन्स का विशाल भंडार: इस लैब में सोवियत युग के जैविक हथियारों से जुड़े नमूनों से लेकर प्राचीन जम चुकी बर्फ में दबे खतरनाक जैविक अवशेष रखे गए हैं। अगर ये बाहर आते हैं, तो इंसान की प्रतिरक्षा प्रणाली के पास इनसे लड़ने का कोई जरिया नहीं होगा।
इंसानी चूक और तकनीकी खामी: चाहे कितनी भी सख्त सुरक्षा क्यों न हो, एक छोटी सी तकनीकी खराबी, गैस लीक या शोधकर्ता की लापरवाही वायरस को लैब के बाहर ले जाने के लिए काफी है।
तेजी से प्रसार की आशंका: आज के वैश्वीकरण के दौर में जहां एयर ट्रैवल के जरिए एक शहर से दूसरे शहर कुछ घंटों में पहुंचा जा सकता है, साइबेरिया के किसी कोने से निकला वायरस कुछ ही दिनों में पूरी दुनिया में फैल सकता है। फिलहाल, वैज्ञानिक और सुरक्षा एजेंसियां इस स्थिति पर बारीक नजर रखे हुए हैं। लेकिन इस हादसे ने एक बात साफ कर दी है कि जैविक प्रयोगों की यह दौड़ पूरी दुनिया को कांच के एक ऐसे पुल पर खड़ा कर रही है, जो जरा सी दरार से पल भर में चकनाचूर हो सकता है।
खतरनाक बैक्टेरीया
रूस के साइबेरिया स्थित इरकुत्स्क शहर के ‘इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट’ में काम करने वाली २८ वर्षीया प्रयोगशाला तकनीशियन दारिया शिपिलोवा की संदेहास्पद न्यूमोनिक प्लेग के कारण मौत हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, लैब में नमूनों पर काम करने के दौरान उनसे गलती से एक टेस्ट ट्यूब टूट गई थी, जिसमें जिंदा बैक्टीरिया मौजूद थे। इसके बाद वह गंभीर निमोनिया के लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती हुर्इं, जहां उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। एहतियात के तौर पर रूसी प्रशासन ने मृतक के संपर्क में आए लगभग २०० लोगों को मेडिकल ऑब्जर्वेशन (क्वारंटीन) में रख दिया है। इरकुत्स्क शहर में सार्वजनिक कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया है।
