-एक लाख करोड़ के शक्तिपीठ महामार्ग पर भड़की सियासत;
-सुप्रिया सुले ने पूछा- सूखे के बीच इतनी बड़ी रकम क्यों?
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में सूखे और किसानों की परेशानी के बीच नागपुर-गोवा शक्तिपीठ महामार्ग की लागत को लेकर महायुति सरकार घिर गई है। संशोधित प्रस्ताव के मुताबिक, करीब ८५६ किलोमीटर लंबे इस महामार्ग पर लगभग १.०१ लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, जबकि कई इलाकों में किसान इसका विरोध कर रहे हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने सरकार से पूछा कि शक्तिपीठ महामार्ग के लिए एक लाख करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं, तो सूखे से जूझ रहे किसानों और विद्यार्थियों की मदद के लिए धन क्यों नहीं? उन्होंने किसानों को तत्काल सहायता, विद्यार्थियों की फीस माफी और कर्जमाफी की मांग की। सुले का सवाल है। जब राज्य पर कर्ज का बोझ है, तब इस परियोजना पर इतना भारी खर्च क्यों जरूरी है? किसानों की आपत्ति जमीन अधिग्रहण और आजीविका पर पड़ने वाले असर को लेकर है। सरकार इसे विकास की परियोजना बता रही है, लेकिन विरोध के बीच सवाल कायम है: क्या इसकी लागत और जरूरत पर नए सिरे से सार्वजनिक जवाबदेही नहीं होनी चाहिए?
