मुख्यपृष्ठनए समाचारकाय शिजतंय दिल्लीत–देवाभाऊंचा पत्ता की नवी सत्ता?

काय शिजतंय दिल्लीत–देवाभाऊंचा पत्ता की नवी सत्ता?

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे फिर दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लगभग एक घंटे मुलाकात की। आधिकारिक तौर पर शिंदे ने बताया कि उन्होंने राज्य की सूखे की स्थिति, किसानों की सहायता और महाराष्ट्र से जुड़े विषय प्रधानमंत्री के सामने रखे। लेकिन इस बार उनकी दिल्ली यात्रा के पीछे विधान परिषद चुनाव में भाजपा और शिंदे गुट के बीच छिड़ा सीटों का संग्राम भी साफ दिखाई दे रहा है।
पुणे शिक्षक और पुणे स्नातक-दोनों सीटें भाजपा ने अपने खाते में डाल लीं। स्नातक सीट से स्मिता जाधव और शिक्षक सीट से कौस्तुभ गावड़े को उम्मीदवार बनाया गया। शिंदे गुट शिक्षक सीट पर मंगेश चिवटे की दावेदारी पहले ही जता चुका था। उद्योग मंत्री उदय सामंत ने सार्वजनिक रूप से चिवटे को शिवसेना का उम्मीदवार बताया। बताया गया कि उन्हें स्वयं शिंदे ने मैदान में उतरने का निर्देश दिया। यानी महायुति का गठबंधन एक है, लेकिन पुणे में उम्मीदवार दो-दो तैयार हैं। भाजपा ने सीट ली, शिंदे गुट ने आदेश नहीं माना और सहयोग की गाड़ी नामांकन केंद्र पहुंचते-पहुंचते दो दिशाओं में मुड़ गई।
भाजपा के भीतर भी शांति नहीं है। पुणे स्नातक सीट से टिकट के दावेदार माने जा रहे शरद लाड ने उम्मीदवारी नहीं मिलने पर नामांकन दाखिल कर दिया। अमरावती शिक्षक, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर की सीटों पर भी महायुति के घटक दलों के बीच दावे-प्रतिदावे सामने आए हैं। इसी राजनीतिक धुएं के बीच शिंदे दिल्ली पहुंचे। चर्चा है कि उन्होंने भाजपा नेतृत्व के सामने सीट बंटवारे और अपने गुट की नाराजगी रखी। उधर शिंदे समर्थकों की बैठकों में अलग ही सवाल घूम रहा है, साहेब मोदी और अमित शाह से मिलने को जितने उत्सुक रहते हैं, उतना तो नेता अपनी पार्टी के अध्यक्ष से मिलने को भी नहीं रहता!
हर दिल्ली यात्रा के बाद महाराष्ट्र में अफवाहों की नई लोकल चल पड़ती है,मंत्रिमंडल विस्तार होगा, शिंदे की हिस्सेदारी बढ़ेगी या देवेंद्र फडणवीस का पत्ता कटेगा? मुख्यमंत्री बदलने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं है। फिलहाल देवाभाऊ की कुर्सी सुरक्षित है। मगर भाजपा ने विधान परिषद की सीटों पर शिंदे को जिस तरह ‘रुलाया’, उसके बाद उनका दिल्ली पहुंचना अटकलों को भरपूर भोजन दे गया।

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