मुख्यपृष्ठनए समाचारभारत सरकार सोती रही, और ‘चिकन नेक' के पास बन गया बांग्लादेश...

भारत सरकार सोती रही, और ‘चिकन नेक’ के पास बन गया बांग्लादेश का ‘ड्रोन हब’

-हिंदुस्तान की सुरक्षा पर गहराता संकट!
मनमोहन सिंह / नई दिल्ली
हिंदुस्तान के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से अहम सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के मुहाने पर एक बड़ा सुरक्षा संकट मंडराने लगा है। बांग्लादेश अब चीन और तुर्की की मदद से अपने बोगुरा क्षेत्र में एक विशाल ड्रोन निर्माण और रिपेयरिंग हब तैयार कर रहा है। बोगुरा, हिंदुस्तान को पूर्वोत्तर से जोड़ने वाले महज २२ किलोमीटर चौड़े सिलीगुड़ी कॉरिडोर से केवल १०० से १५० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
चीन और तुर्की का
खतरनाक गठजोड़
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश तुर्की की उन्नत तकनीक और चीन के वित्तीय सहयोग (जैसे सीईटीसी के साथ समझौता) का इस्तेमाल करके अपने कपड़ा उद्योग के विशाल अनुभव और कर्मचारियों की मदद से ‘कम्पोजिट मटीरियल’ आधारित लड़ाकू ड्रोन बनाने की तैयारी में है। तुर्की के घातक ‘बायराक्तार टीबी २’ जैसे ड्रोन और चीनी प्लेटफॉर्म का यह संगम ढाका को पूर्वी मोर्चे पर एक नया ड्रोन युद्ध-केंद्र बनाने की क्षमता प्रदान कर रहा है।
‘चिकन नेक’ क्यों है इतना महत्वपूर्ण
पश्चिम बंगाल का सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण सामरिक क्षेत्र है। यह संकरा भू-भाग देश के पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। इसकी भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां किसी भी तरह की सुरक्षा चुनौती का सीधा असर पूर्वोत्तर के साथ भारत के संपर्क और सैन्य-रणनीतिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।
ड्रोन गतिविधियों ने बढ़ाई चिंता
बांग्लादेश की ओर से इस क्षेत्र के आसपास ड्रोन तकनीक और ड्रोन गतिविधियों के विस्तार की खबरों ने सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी, सीमा की रेकी और अन्य सुरक्षा गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। ऐसे में संवेदनशील सीमा क्षेत्र के करीब ड्रोन क्षमताओं का बढ़ना भारत के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
भारत की निगरानी व्यवस्था पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने संवेदनशील क्षेत्र के करीब ऐसी गतिविधियां बढ़ रही हैं तो भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है? सीमा पर लगातार बदलती तकनीकी चुनौतियों के बीच केवल पारंपरिक सुरक्षा उपायों के भरोसे रहना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल ने सीमा सुरक्षा के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।
हिंदुस्थान के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्यों?
सीधा खतरा सिलीगुड़ी कॉरिडोर को: युद्ध या आपातकाल की स्थिति में हिंदुस्तान का पूर्वोत्तर राज्यों से संपर्क काटने की साजिश रचने वाली ताकतों के लिए यह जगह सबसे मुफीद मानी जाती है।
टू-फ्रंट ड्रोन थ्रेट: पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान पहले से तुर्की ड्रोन इस्तेमाल कर रहा है। अब पूर्वी सीमा पर भी तुर्की-चीन प्रायोजित ड्रोन फैक्ट्री के उभरने से इंडियन एयर डिफेंस प्रणालियों पर दोतरफा दबाव बनेगा।
तेज मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम: स्थानीय स्तर पर पार्ट्स बनने और मरम्मत सुविधा होने से संघर्ष के समय बांग्लादेशी या सहयोगी सेनाओं को विदेशी स्पेयर पार्ट्स पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

अन्य समाचार