भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने नरेंद्र मोदी को पहले ‘बड़ा भाई’ कहा; फिर विष्णु का अवतार बताया। चिट्ठी में उन्होंने लिखा कि २०१९ की मुलाकात के बाद अपने ही शब्दों पर सोचा और फिर उन्हें सही माना। तारीफ का रॉकेट भाईचारे से सीधे वैकुंठ पहुंच गया; अब पाठक पूछें, अगली सीढ़ी कल्कि की तो नहीं! का हो, चने के झाड़ पर चढ़ाने का कोई मकसद तो होगा; मगर इतना ऊंचा चढ़ाने से पहले भूटानी प्रधानमंत्री हिंदुस्थानियों से भी पूछ लेते कि उनके हिसाब से कौन-कौन से गुण अवतारी हैं। जरा भाषणों का रिकॉर्ड भी पलट लेते; नाले की गैस से चाय बनाने वाले किस्से से लेकर बादल और रडार वाली दलील तक। किसान के ट्रैक्टर-ट्यूब में बायोगैस भरकर खेत तक ले जाने की कहानी भी सुन लेते; वह प्रधानमंत्री के भाषण में किसान के जुगाड़ के उदाहरण के रूप में आई थी, सरकारी उपलब्धि के रूप में नहीं। पत्र में भारत की ओर से भूटान की १३वीं योजना के लिए सहायता और २०४७ के विकसित भारत के विजन की तारीफ भी है। कूटनीति में भाईचारा अपनी जगह; पर प्रशंसा इतनी हो कि जनता को भी लगे, वाह रे! दुनिया शायद चिट्ठी पढ़ेगी; घर में लोग पूछेंगे, बाकी गुणों की जांच किसने की?
