मुख्यपृष्ठअपराधफडणवीस की पुलिस फेल, अपराध घटने के दावों की खुली पोल

फडणवीस की पुलिस फेल, अपराध घटने के दावों की खुली पोल

-मुंबई में बलात्कार बढ़े, नाबालिग बेटियां भी सुरक्षित नहीं!
-जुलाई २०२६ तक बलात्कार के ७४१ मामले दर्ज

-नाबालिग लड़कियों से बलात्कार के मामले ३६४ से बढ़कर ४०० हुए

फिरोज खान / मुंबई

मुंबई दिल्ली की तरह असुरक्षित शहर बनता जा रहा है। पुलिस अपराध पर नियंत्रण करने के दावे कर रही है, लेकिन हकीकत यह है कि महिलाओं के लिए मुंबई खतरे की सिटी बनती जा रही है। ताजा आंकड़े यही बता रहे हैं कि फडणवीस की पुलिस महिलाओं और नाबालिग बच्चियों को सुरक्षित रखने में नाकाम है। मुंबई में महिलाओं के खिलाफ अपराध कम होने के सरकारी दावों के बीच आंकड़ों की दूसरी तस्वीर ने हकीकत सामने ला दी है।
जुलाई २०२६ तक मुंबई में बलात्कार के ७४१ मामले दर्ज हुए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में ७१० मामले थे। नाबालिग लड़कियों से बलात्कार के मामले भी ३६४ से बढ़कर ४०० हो गए। सबसे गंभीर सवाल नाबालिग बेटियों की सुरक्षा को लेकर है। जिन बच्चियों को स्कूल, घर और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए, अगर वही यौन अपराधियों का निशाना बन रही हैं तो प्रशासन की रोकथाम व्यवस्था पूरी तरह चरमराती नजर आ रही है।
एफआईआर तक सीमित न रहे महिला सुरक्षा
पीड़ित परिजनों का कहना है, महिलाओं की सुरक्षा केवल एफआईआर दर्ज करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अपराध होने से पहले उसे रोकना पुलिस की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसके लिए संवेदनशील इलाकों में प्रभावी गश्त, शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई, महिलाओं की शिकायतों की गंभीरता से जांच और अपराधियों में कानून का डर पैदा करना जरूरी है।

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