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सूखे ने छीनी फसल, अब मवेशी बेचने की नौबत!

-महाराष्ट्र के २६५ तालुकाओं में संकट; केंद्रीय टीम खेतों तक पहुंची

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र में सूखे की मार खेतों से निकलकर पशुधन तक पहुंच गई है। यवतमाल जिले के सभी १६ तालुकों में सूखे की स्थिति है। कपास, सोयाबीन और तुअर की फसल को नुकसान हुआ है। लोकसत्ता की मौके की रिपोर्ट के अनुसार, चारे की कमी के कारण कुछ किसानों ने मवेशी बेच दिए हैं। जिले में करीब ८.१८ लाख पशुधन है; किसानों को चिंता है कि चारा और पानी जुटाना आगे और कठिन होगा।
केंद्र का अंतर-मंत्रालयीन दल ८ से ११ अक्टूबर तक राज्य के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहा है। दल बारिश की कमी, फसल नुकसान, पेयजल और पशुओं के चारे की स्थिति का आकलन करेगा। यवतमाल में टीम ने खेतों और जलस्रोतों का निरीक्षण कर किसानों से उनकी मुश्किलें जानीं। राज्य ने सूखाग्रस्त तालुकों के लिए कुछ रियायतें घोषित की हैं, लेकिन फसल नुकसान की वास्तविक आर्थिक मदद सर्वेक्षण और आगे के फैसले पर निर्भर करेगी।
जनता त्रस्त…अधिकारी विदेश दौरे में मस्त!
महाराष्ट्र में आपदा से किसान बेहाल हैं, विद्यार्थियों को अपनी मांगों के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है और आम जनता महंगाई तथा आर्थिक संकट से जूझ रही है। दूसरी ओर, सरकारी अधिकारियों के विदेश दौरों पर कथित तौर पर १० करोड़ रुपए खर्च किए जाने और लंदन की एक कंपनी को ५ करोड़ रुपए दिए जाने के मुद्दे ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।

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