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मुस्लिम वर्ल्ड : तूफान से पहले की शांति!..क्या अमेरिका के झांसे मे आएगा ईरान?

-सूफी खान

अमेरिका के प्रेसिडेंट ट्रंप के बयानों से पूरी दुनिया वाकिफ है। खास कर ईरान से जंग के बीच उनके बयानों और धमकियों ने खूब सुर्खियां भी बटोरीं और उन्हें रुसवा भी किया। पिछले दिनों ईरान को खत्म कर देंगे वाली धमकी के बाद अब ट्रंप का एक और बयान आया है जिसमें वो कहते हैं कि तीन नवंबर को होने वाले मिडटर्म इलेक्शन से पहले अमेरिका ईरान पर फिर से हमला नहीं करेगा। दरअसल अमेरिका के जरिए फारस की खाड़ी में ९ हजार फौजी और तीन जंगी बेड़े भेजे जाने की खबरों के बीच जिनके आधार पर कयास लगने लगे थे कि जंग फिर होगी और भीषण होगी। ट्रंप ने नई बात कह दी।
रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए इस सप्ताह प्रचार करते हुए ट्रंप ने संकेत दिया था कि उन्हें भरोसा है कि युद्ध का निर्णायक दौर चुनाव से पहले या उसके तत्काल बाद खत्म हो सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि उन्होंने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान फिर शुरू करने के विकल्प को खुला रखा है। हालांकि, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका तीन नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा।
ट्रंप ने मंगलवार को कहा था कि अमेरिका को ईरान के साथ चल रहे टकराव को अच्छे तरीके से या बुरे तरीके से खत्म करना होगा। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) इन योजनाओं को तैयार कर रहा है। लेकिन एक्सपर्ट कहते हैं कि ट्रंप जो कहते हैं, वो करते नहीं हैं, अगर इस पर्सेप्शन के साथ उनके बयान को देखें तो हम पाते हैं कि हो सकता है कि ट्रंप नंवबर से पहले ही अपनी फौजों को ईरान पर हमले का हुक्म दे दें क्योंकि अमेरिका में तैयारी जबरदस्त चल रही है। अमेरिका बार बार आरोप लगा भी रहा है कि ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम नहीं रोक रहा है। जबकि ईरान का साफ कहना है एनर्जी जरुरतों के लिए न्यूक्लियर प्रोग्राम जारी रहेगा। देखा जाए तो ईरान पर हमले के फिर बहाने तलाशे जा रहे हैं और अब जब ट्रंप ने कहा है कि मिड टर्म इलेक्शन से पहले ईरान पर हमला नहीं होगा तो जानकार कहते हैं जरूर होगा।
ईरान के साथ जंग की भूमिका बनने लगी है। जी हां, अगले कुछ दिनों में मिडिल ईस्ट में कुछ बड़ा हो सकता है। एक्सपर्ट कहते हैं कि ईरान के हिमायती हूतियों के खिलाफ तो यमन में एक मोर्चा खोल भी दिया गया है, अब ईरान पर हमले के बहाने तलाशे जा रहे हैं। अमेरिका के तरफ से जो एक्शन हो रहा है उसे देखते हुए लगता है कि या तो अमेरिका ईरान को डराना चाह रहा है या फिर प्रेशर बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। जिससे ईरान अपनी शर्तों को छोड़कर अमेरिका के हिसाब से समझौते की मेज पर आ जाए। लेकिन जंग का बहाना तलाशने के लिए फ्लाइ दुबई प्लेन कांड का भी सहारा लिया जा सकता है। हालांकि ईरान का नाम अमेरिका ले जरूर रहा है शुरु से इस मामले में, लेकिन अभी तक पूरी तरह ईरान को इस वारदात के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। कहा जा रहा है जांच चल रही है,जांच जारी है। हो सकता है कि आगे उसी रिपोर्ट के आधार पर ईरान पर हमला हो जाए। इस वारदात का जिम्मेदार ईरान था इसलिए अब हम इस पर अटैक कर रहे हैं।
मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट कहते हैं कि अमेरिका के इशारों से ये तो दिख रहा है कि जंग के बादल छंटे नहीं है और ईरान में आईआरजीसी भी पहले ही धमकी दे चुकी है कि अगर इस बार हम पर हमला हुआ तो हमारा पलटवार जियोग्राफी बदलने वाला होगा। यानी जंग सिर्फ मिडिल ईस्ट तक महदूद नहीं रहेगी, बल्कि और आगे बढ़ेगी।

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