-मुंबईकर बोले, `सड़क पर निकले तो क्या पुलिस उठा लेगी?’
सामना संवाददाता / मुंबई
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी आंदोलन की गूंज अब मुंबई तक पहुंच गई है। दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की धरपकड़ के बाद रविवार को दादर स्थित ऐतिहासिक छत्रपति शिवाजी पार्क परिसर में भी पुलिस ने कड़ा बंदोबस्त किया और कई नागरिकों को हिरासत में ले लिया। कुछ युवाओं ने आरोप लगाया कि वे केवल घूमने आए थे या काम से घर लौट रहे थे, लेकिन पुलिस ने उनकी बात नहीं सुनी। एक युवक का दावा है कि वह पुणे जाने के लिए दादर आया था, लेकिन उसे प्रदर्शनकारी समझकर हिरासत में ले लिया गया।
बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन को लेकर दादर, गिरगांव सहित इलाके के रास्तों पर अवरोधक लगा दिए गए और वहां आने-जाने वाले लोगों की पूछताछ की जाने लगी। इस दौरान आंदोलन से कोई संबंध नहीं रखने वाले आम नागरिकों को भी हिरासत में लिए जाने के आरोप सामने आए हैं। जिससे लोगों में सरकार के प्रति भारी नाराजगी बढ़ रही है। स्थानीय नागरिक सुरेश कोल्हे ने कहा कि आम नागरिकों की आवाजाही को किस हद तक सीमित किया जा सकता है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन उस प्रक्रिया में निर्दोष नागरिकों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।
महायुति राज में लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन
महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार के कार्यकाल में शांतिपूर्ण प्रदर्शन और नागरिकों की स्वतंत्र आवाजाही को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाया है। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग से जुड़े आंदोलन को लेकर उठे विवाद का जवाब केवल पुलिस बंदोबस्त से नहीं दिया जा सकता। विपक्ष नेता सचिन सावंत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार और कानून-व्यवस्था, दोनों महत्वपूर्ण हैं। इसलिए जरूरी है कि पुलिस कार्रवाई तथ्यों और कानून के आधार पर हो तथा आंदोलन से असंबंधित नागरिकों को बेवजह हिरासत में लेने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच की जाए।
